PMCH के किचेन में ऑमलेट बनाने पहुंच गए थे वाजपेयी, फिर सबको खिलाया भी

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अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर पूरे देश भर में राष्ट्रीय शोक व्याप्त है. केंद्र सरकार ने तो 7 दिनों के राष्ट्रीय शोक का एलान किया है. हर किसी की आँखें नम हैं. नेता-अभिनेता हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है. सभी वाजपेयी के निधन को अपूरणीय क्षति बता रहे हैं. उनके निधन पर कई हस्तियों ने उनके साथ बिताये पलों को साझा किया है. यादें को बताते हुए सबकी आंखें नम हो जा रही हैं. बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट सुरेंद्र किशोर ने भी अटल बिहारी के साथ बिताये एक वाकये को साझा किया है.

अब पढ़िए सुरेंद्र किशोर का यह पोस्ट

बात 1974 की है।उस साल 4 नवंबर को जय प्रकाश नारायण पर पटना में लाठी चली थी। सी.आर.पी.एफ.की उस लाठी को रोकने के क्रम में नानाजी देशमुख की बांह पर गहरी चोट लगी थी। नाना जी के अलावा भी उस दिन कई अन्य जेपी आंदोलनकारी बुरी तरह घायल होकर पटना मेडिकल काॅलेज अस्पताल पहुंचे थे।


बाद में अटल बिहारी वाजपेयी, नाना जी को देखने दिल्ली से पटना आए। मैं भी एक छोटी पत्रिका के संवाददाता के रूप में लगभग रोज ही राजेन्द्र सर्जिकल वार्ड में जाया करता था। उस दिन अटल जी अस्पताल के किचेन में चले गए। वे लगे आमलेट बनाने ।नाना जी के साथ मेरे अलावा कुछ आंदोलनकारी भी बैठे थे।

मना करने के बावजूद अटल जी ने बारीे-बारी से हम सबके लिए आमलेट खुद अपने हाथों से बनाया। उतने बड़े नेता के हाथों से बना आमलेट खाकर हमलोग गद्गद थे। आमलेट प्रकरण ही नहीं , बल्कि अटल जी का पूरा व्यक्तित्व, हाव भाव और बातचीत का शालीन लहजा लोगों को गद्गद कर देता था।

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