अशोक के ऐतिहासिक शिलालेख के लिए फेमस है लौरिया नंदनगढ़, नेचर लवर्स के लिए है बेहद खास

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बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित लौरिया नंदनगढ़ पर्यटन का शानदार केंद्र है। इलाके में खूबसूरत मौसम और नेचुरल ब्यूटी को देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। लौरिया नंदनगढ़ का संबंध अशोक के शिलालेख और स्तूपों से रहा है। ईसा से करीब 400 पहले अशोक ने यहां पर स्तम्भ लेख और स्तूप का निर्माण भी करवाया था। बौद्ध धर्म के पर्यटन केंद्र के रूप में इस जगह का खास महत्व है। हालांकि लौरिया नंदनगढ़ के बारे में काम ही लोग जानते हैं लेकिन इस जगह देश विदेश से पर्यटक घूमने आते हैं और समय के साथ अब इस जगह को बिहार में ख्याति मिलने लगी है। लौरिया नंदनगढ़ बेतिया जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है।

सम्राट अशोक का ऐतिहासिक स्तम्भ लेख और स्तूप

सम्राट अशोक ने ईसा से करीब 400 साल पहले अपने राज का प्रचार प्रसार करने के लिए स्तम्भ लेख लिखवाया था। स्तम्भ से सटे क्षेत्र में अशोक द्वारा बनवाए गए 15 लघु स्तूप हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायी स्तूप की पूजा भी करते हैं। आपस में जुड़े हुए 15 स्तूपों का आकर काफी बड़ा भी है। स्तूपों और स्तम्भ की खुदाई आर्कियोलॉजिकल सर्वे के डायरेक्टर जनरल अलेक्सेंडर कनिंघम ने शुरू की थी। बाद में एएसआई के द्वारा ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण किया गया।

प्राकृतिक सुंदरता भी है बेहद खास 

लौरिया नंदनगढ़ कस्बे में प्राकृतिक सुंदरता भी शानदार है। तराई क्षेत्र में होने के कारण मौसम भी आरामदायक बना रहता है। स्तूपों और स्तम्भ के आसपास छोटे छोटे टीले और हरी भरी सुंदरता देश विदेश से आने वाले सैलानियों को खूब लुभाती है।

ट्रैवेल और ठहरने की व्यवस्था 

लौरिया नंदनगढ़ एक छोटा सा कस्बा है। वहां तक पहुंचने के लिए पश्चिम चंपारण या बेतिया से टैक्सी में ट्रैवेल किया जा सकता है। बेतिया और पश्चिम चंपारण जिले में ठहरने के लिए कई होटल और लॉज उपलब्ध हैं। दूर दराज से आने वाले पर्यटक यहीं ठहरते हैं।

 

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