25 साल से 25 रु. फीस में कर रहे मरीजों का इलाज, जो देने में असमर्थ उनसे मांगते भी नहीं

खबरें बिहार की

पटना के कदमकुआं माेहल्ले में एक छाेटा-सा कमरा, उसमें एक टेबल, एक पंखा, रोशनी के लिए एलईडी ब्लब, बेंच और कुछ कुर्सियां। कमरा पुराना है। कहीं-कहीं पेंट भी निकल चुका है। एक अलमारी है, जिसमें कुछ दवाइयां और किताबें हैं। इस कमरे के बाहर रोज सुबह-शाम मरीजाें की लंबी कतार लगती है। जी हां, यह डॉ. अरविंद कुमार सिंह का क्लीनिक है।

डॉ. अरविंद 25 साल से महज 25 रुपए फीस में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। कमरे की क्षमता केवल 10 लोगों की है। अगर आप 11वें नंबर पर हैं ताे आपको बाहर इंतजार करना पड़ेगा। इनका उद्देश्य है गरीब अपना सही इलाज कम पैसे में करवा पाएं। किसी की जान गलत इलाज की वजह से न जाए। कम से कम जांच में उनकी बीमारी की पहचान और सस्ती दवाओं से इलाज हो जाए।

रोजाना 200 मरीज देखते हैं अरविंद

  • डॉ. अरविंद फिजिशियन हैं। राेजाना आने वाले 200 से अधिक मरीजाें में राजधानी के साथ ही बाढ़, फतुहा और आसपास के इलाकों के भी होते हैं। क्लीनिक के इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्याें नहीं बढ़ाया, इस सवाल पर मुस्कुराते हुए डॉ. अरविंद कहते हैं- “मैं इसमें संतुष्ट हूं, क्योंकि मेरे मरीज संतुष्ट हैं।” 
  • वे बताते हैं, “नालंदा के चंडी ब्लॉक से नौकरी की शुरुआत की तो गरीबी को बहुत करीब से देखा। पैसे का मोह उसी समय खत्म हो गया और ठाना कि इनके लिए कुछ करूंगा। पटना आकर क्लीनिक शुरू किया। जब पीएमसीएच में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर पढ़ाने लगे ताे क्लीनिक पर मुश्किल से एक घंटे का समय दे पाते थे। उस वक्त फीस भी तय नहीं थी। लाेग स्वेच्छा से जो भी देते थे उसे रख लेता था। वहां के बाद साल 2008 से एनएमसीएच में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर पढ़ाने लगा। 30 अप्रैल 2019 को एनएमसीएच से रिटायर हो गया। शुरुआत में क्लिनिक पर बहुत कम लोग आते थे। लेकिन, अब लाइन इतनी लंबी हो जाती है कि सड़क पर लोग खड़े रहते हैं।

 
फीस इसलिए क्योंकि नि:शुल्क इलाज पर मरीजों को भराेसा नहीं 
आप चाहते तो सेवा नि:शुल्क भी दे सकते हैं, तो 25 रुपए क्यों? इस सवाल पर डॉ. अरविंद ने कहा कि नि:शुल्क इलाज पर मरीज पूरी तरह भरोसा नहीं कर पाते। इसीलिए मैंने 25 रुपए फीस रखी। लेकिन जिन मरीजाें के पास पैसे नहीं हाेते उनसे नहीं मांगता हूं। कई गरीबों के इलाज का खर्च खुद उठाकर अस्पतालों में एडमिट करवाया है। क्लीनिक से कभी कोई मरीज निराश होकर नहीं लौटता है। आगे क्लीनिकको बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है। वो अपनी कमाई और पूंजी मरीजों की संतुष्टि और विश्वास को मानते हैं। अरविंद ने एमबीबीएस एमजीएम कॉलेज, जमशेदपुर और पीजी पटना मेडिकल कॉलेज से किया है। 

Sources:-Dainik Bhasakar

Leave a Reply

Your email address will not be published.