चैत्र पूर्णिमा को दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। वैसे तो बजरंग बली के कई नाम हैं लेकिन उनकी स्तुति के लिए खासतौर पर 12 नामों का जाप किया जाता है। इसे हनुमान द्वादशनाम स्तोत्र कहते हैं। इन नामों का जाप भक्त कई तरह की समस्याओं से मुक्ति के लिए करते हैं। 

हनुमान द्वादशनाम स्तोत्र में पहला नाम दिया गया है हनुमान, दूसरा नाम अंजनीसुत, तीसरा नाम है वायु पुत्र, चौथा नाम है महाबली, पांचवां नाम है रामेष्ट यानी श्रीराम के प्रिय, छठा नाम है फाल्गुन-सखा यानी अर्जुन के मित्र, सातवां नाम है पिङ्गाक्ष यानी भूरे नेत्रवाले, आठवां नाम है अमित विक्रम, नौवां नाम है उदधिक्रमण यानी समुद्र को अतिक्रमण करने वाले, दसवां नाम है सीताशोक विनाशन यानी सीताजी के शोक का नाश करने वाले, ग्याहरवां नाम है लक्ष्मण प्राणदाता यानी लक्ष्मण को संजीवनीबूटी द्वारा जीवित करने वाले और बाहरवां नाम है दशग्रीवदर्पहा यानी रावण के घमंड को दूर करने वाले।

ये है संपूर्ण हनुमान द्वादशनाम स्तोत्र

ॐ हनुमान् अंजनी सूनुर्वायुर्पुत्रो महाबलः, श्रीरामेष्टः फाल्गुनसंखः पिंगाक्षोऽमित विक्रमः।
उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः, लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।
एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:। स्वाल्पकाले प्रबोधे च यात्राकाले य: पठेत्।।
तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्। राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन।।

अर्थ:- हनुमान, अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबली, रामेष्ट, फाल्गुन सखा, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उदधिक्रमण, सीता शोक विनाशन, लक्ष्मण प्राणदाता, दशग्रीव दर्पहा। वानरराज हनुमान के इन 12 नामों का जाप सुबह, दोपहर, संध्याकाल और यात्रा के दौरान जो करता है। उसे किसी तरह का भय नहीं रहता, हर जगह उसकी विजय होती है।  

Sources:-Dainik Bhasakar

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