बिहार में यहाँ मिलीं 12वीं शताब्दी की दो मूर्तियां, लेकिन फिर इसलिए हो गया बवाल

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बहादुरपुर प्रखंड की ओझौल पंचायत के धर्मपुर पोखर से बुधवार को भीष्म की दो बेशकीमती मूर्तियां बरामद की गई। मूर्तियां 12वीं शताब्दी की प्रतीत हो रही है। पोखर की खुदाई के दौरान एक ट्रैक्टर मालिक को मूर्तियां मिलीं।

एक मूर्ति ढाई फीट ऊंची और दूसरी एक फीट ऊंची है। मूर्तियां मिलने पर ट्रैक्टर मालिक उन्हें अपने गांव चांडी ले गया। इसकी जानकारी मिलने पर औझौल के लोग आक्रोशित हो गए।

मूर्तियों को गांव लाने की मांग को लेकर उनलोगों ने समस्तीपुर एसएच को ओझौल पुल के पास जाम कर दिया। सूचना पर बीडीओ भी पुलिस को लेकर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद जाम हटाया जा सका। दोनों गांव के बीच तनाव को देखते हुए गुरुवार को बैठक बुलाई गई है। बैठक में निदान का रास्ता निकाला जाएगा।

वहीं दूसरी ओर मूर्ति बरामदगी को लेकर पुरातत्व विभाग सक्रिय हो गया है। अधिकारी प्रशासन के लगातार संपर्क में है। स्थानीय लोगों के अनुसार धर्मपुर पोखरा मे मिट्टी खुदाई हो रही थी। इसी दौरान चांडी के ट्रैक्टर मालिक को दो मूर्तियां मिली। दोनों मूर्तियों को लेकर वे अपने घर चले आए। इसकी जानकारी मिलने पर आक्रोशित लोग मूर्तियों को गांव लाने की मांग करते हुए प्रदर्शन करने लगे। वहीं ट्रैक्टर मालिक ने अपने गांव चांडी में बड़ी मूर्ति को स्थापित कर दिया।

इसके बाद लोगों ने वहां पूजा शुरू कर दी। बताया जाता है कि छोटी मूर्ति को उसने सार्वजनिक नहीं किया है। समाचार लिखे जाने तक दोनों गांव के लोगों के बीच तनाव बना हुआ है। बीडीओ अविनाश कुमार ने बताया कि तनाव को देखते हुए गुरुवार को 10 बजे दोनों गांव के लोगों की बैठक बुलायी गई है। आला अधिकारियों को मामले से अवगत करा दिया गया है।

इधर, महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह संग्रहालय के सहायक अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार मिश्रा ने बताया कि बरामद की गई मूर्तियां कर्नाट राजा के शासनकाल की है।

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