बिहार का अनरसा हुआ इंटरनेशनल- यूरोपियन देशों समेत रूस और चीन से आ रहा डिमांड

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अनरसे एक प्रकार का मीठा बिहारी व्यंजन है जो चावल के आटे, तिल और चीनी से बनाया जाता है। अनरसे दो तरह के बनाये जाते हैं। गोल गोल गोलियाँ या चपटी टिकियों के आकार में। गोल अनरसे खाते समय कुरकुरे के साथ साथ अन्दर से मुलायम होते है जिनका स्वाद एकदम अलग होता है।

मावे के अनरसे साधारण अनरसों से ज्यादा स्वादिष्ट व मुलायम होते हैं। ये उन पकवानों की श्रेणी में आते हैं जिन्हें आमतौर पर तीज-त्यौहारों या किसी विशेष अवसर पर बनाया जाता है।

अनरसा की खुशबू व मिठास किसी को भी अपनी ओर एक बार जरूर खींच लेती है. जो एक बार मीठे अनरसे का स्वाद चख ले वो इसका मुरीद बन जाता है.

अनरसा की मिठास की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि बिहार की पारंपरिक व अतिप्राचीन मिठाई अनरसा विदेशियों को भी खूब भाती है.

हालांकि अनरसा का बाज़ार अन्य भारतीय मिठाइयों के मुकाबले थोड़ा सीमित है और इसमें मिलावट की गुंजाइश बहुत कम होती है, जिसके चलते अनरसा बनाने वालों को बहुत फायदा नहीं होता है. लेकिन कम मुनाफे के बावजूद कुछ मिठाईवाले अपनी इस पारंपरिक मिठाई को पीढ़ियों से बनाते आ रहे हैं.

पटना के म्यूजियम के सामने आपको ढेर सारी अनरसा की दुकानें दिख जाएंगी. यहां के दुकानवालों की माने तो अनरसा की डिमांड विदेश तक से आती है. वे कहते हैं कि हमारे बहुत से एनआरआई ग्राहक हैं जो पटना आने पर अनरसा लेकर ज़रूर जाते हैं.

यही नहीं, कुछ ग्राहक अपने विदेशी साथियों के लिए खास आर्डर देते हैं. अभी तक यहां पर अमेरिका, रूस, इंग्लैड, चीन आदि देशों में अनरसा के लिए ऑर्डर आते है. साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अनरसा काफी पंसद करते हैं और उनके लिए यहीं से अनरसा जाता है.

गौरतलब है कि अनरसा को अन्य मिठाइयों की अपेक्षा काफी शुद्ध माना जाता है, इसलिए पर्व-त्योहार में इसकी मांग ज़्यादा होती है. इससे जुड़ी एक धार्मिक कथा भी है. अगर शास्त्रों की माने तो ऐसी मान्यता है कि जब पार्वती ने भगवान शंकर को पाने के लिए पूजा-अर्चना की थी तब उन्होंने अनरसा ही प्रसाद के रूप में भगवान शंकर को अर्पित किया था.

यही वजह है बिहार, उतरप्रदेश, झारखंड के लोकप्रिय पर्व तीज में इसे अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है. अनरसा की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि यह जल्दी ख़राब नहीं होता, इसे फ्रिज में रखे बिना भी एक हफ्ते तक आराम से खाया जा सकता है.

बिहार की प्रसिद्ध मिठाई अनरसा, अरवा चावल के आटे, सफेद तिल, खोया और चीनी के मिश्रण से तैयार किया जाता है. इसे तलने के लिए रिफाइंड तेल या घी का इस्तेमाल होता है. अनरसा दो तरह का होता है, एक खोया की स्टफिंग वाला और दूसरी बिना खोया वाला. दोनों की दर में भी अंतर होता है. खोया वाला अनरसा 220 से 240 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है वहीं बिना खोआ वाला 140 से 160 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है.

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