अलग ही स्वाद है अम्मा कैंटीन का, सुबह 4 बजे से ही बनने लगता है खाना, हर दिन आते हैं हजारों लोग

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पटना: तमिलनाडु में पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की अम्मा कैंटीन की खासियत में अपनेआप में अलग है। उनका कम दाम में गरमा-गरम खाना परोसना लोगों को खींचे चले लाता है। इस कैंटीन पर काम करने वाले लोग सुबह के अंधेरे में उठकर खाना बनाना शुरू कर देते हैं। जिससे लोगों को ठीक 7 बजे नाश्ता मिल सके। चेन्नई के लोग मानते हैं कि जयललिता, जिन्होंने चार बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। और ‘अम्मा’ के रूप में गरीबों के दिल में जगह बनाई, वो हमेशा खाने के जरिए उनके साथ जुड़ी हुई है।

जयललिता ने अम्मा कैंटीन की स्कीम फरवरी 2013 को लॉच की थी। इस मकसद से कि गरीबों को मुद्रास्फीति में मदद मिलेगी। अम्मा कैंटिन रोजाना सुबह 7 बजे से 10 बजे तक और 12 से 3, फिर 6 से 9 के बीच अपनी सर्विस देती है। अम्मा कैंटीन की लिस्ट जो भी एक बार पढ़ता है, खाने का स्वाद चखे बिना नहीं जाता।

साउथ की कैंटिन है तो सबसे पहले लिस्ट में इडली आता है। इडली की लागत 1 रुपये, दही चावल की कीमत 3 रुपये है, जबकि नींबू चावल और सांभर चावल 5 रुपये पर आते हैं। यहां के अधिकतर कमरों में अम्मा की फोटोज लगी रहती है, जो उनके होने का अहसास कराती है।

लॉयड रोड स्थित अम्मा कैंटीन में काम करने वाली लीलावती एक आंख से देख पाती है। वो अम्मा कैंटीन में काम कर काफी खुशी है। उनका मानना है कि यहां काम करके महीने में 9 हजार रुपये की सैलरी पाकर वो आज भी खुश है। साउथ के लोगों के लिए जयललिता सिर्फ इंसान ही नहीं थी, लोग उन्हें भगवान की श्रेष्ठी में रख देते थे। जब भी उनकी राजनीतिक रैली होती थी, तब तब लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था।

आज पूरे राज्य में 300 से ज्यादा ऐसे कैंटीन बने हैं जिनमें से आधे अकेले चेन्नई में ही हैं। ये रोजाना साधारण ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर सर्व करते हैं। इस स्कीम से जयललिता को भी फायदा पहुंचा है।

इन कैंटीन्स ने गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग परिवारों के खाने के खर्च को काफी कम कर दिया है और महिलाओं को खाना बनाने और बर्तन धोने से भी आजादी मिली है।

Source: The Hook

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