पटना: कौन बनेगा करोड़पति सीजन 10 में सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने बिहारी महिला बैंड पार्टी के कार्यकर्ताओं के गीत पर जमकर ठुमके लगाए। पटना से गई महिला बैंड ने‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’गाने पर प्रदर्शन भी किया। उनके के साथ लालमति और रचना भी साथ गईं थीं। कार्यक्रम में लालमति ने मुसहर समुदाय में भेदभाव और अशिक्षा के बारे में जानकारी दी। उसने कहा कि वह आज जो कुछ भी है वो सुधा दीदी के कारण है। जब अमिताभ बच्चन ने कहा कि एक अकेली महिला, जिसके अंदर जुनून है, हौसला है तो वह कुछ भी कर सकती है। ‘जहां चाह वहां राह’ को सुधा वर्गीज ने जीवंत किया है। इस दौरान सुधा वर्गीज की आंखें डबडबा गईं।

बिहार के इस महिला बैंड की दिल्ली तक है धूम, ढोल- नगाड़ों की थाप पर थिरकने लगते हैं लोग : बिहार सामाजिक बदलाव की नयी कहानी लिख रहा है। बारह दलित महिलाओं ने कामयाबी की जो मंजिल पायी है उसको पूरा देश सलाम कर रहा है। अनपढ़ और अनगढ़ गरीब महिलाओं ने अपनी मेहनत से साबित कर दिया कि इरादे बुलंद हों तो कामयाबी मिल कर रहती है।

पटना के बगल में है दानापुर। दानापुर का ढिबरा गांव। इस गांव में है एक महिला बैंड पार्टी । नाम है सरगम। बैंड की कमान है सरिता देवी के हाथ में। खेतों में मजदूरी करने वाली महिलाओं ने रोजना दो घंटे तक ढोल, नगाड़े बजाने का रियाज किया। 10 महीने तक लगातार ये सिलसलि चला। ये आसान नहीं था। घर को संभालना, बच्चों की देख रेख करना और रोटी जुटने की मशक्कत के बाद मुश्किल से समय मिल पाता था।

2013 की बात है। ढोल- नगाड़ाका रियाज करते देख कर गांव वाले हंसी उड़ाते थे। कहते थे, लो अब ये भी बनाएंगी बैंड पार्टी। जब मर्दों की बैंड पार्टी ठीक से नहीं चलती तो ये भला क्या मुकाबला करेंगी ? बैंड में शामिल होने पर कई महिलाओं को उनके पतियों ने पिटाई तक भी की। अधिकतर लोग यही कहते रहे के ये औरतें फिजूल का काम कर रही हैं।

समाजसेवी पद्मश्री सुधा वर्गीज ने इन महिलाओं को बैंड पार्टी तैयार करने की सलाह दी थी। नारी गुंजन संस्था की तरफ से आदित्य गुंजन इन महिलाओं को ढोल- नगाड़ा बजाने की ट्रेनिंग देते थे। शुरू में सामाजिक स्तर पर इस कोशिश को स्वीकार नहीं किया गया। लेकिन तमाम परेशानियों के बाद महिलाओं ने ट्रेनिंग जारी रखी। पहले 16 महिलाओं का चुनाव किया गया था लेकिन बाद में 12 महिलाओं ने ही ये रियाज पूरी । बैंड पार्टी मुकम्मल हो गयी।

फिर तो इसके बाद कायापलट हो गया। धीरे- धीरे इस बैंड पार्टी की लोकप्रियता पटना से दिल्ली तक पहुंच गयी। दिल्ली के सरकारी कार्यक्रमों, खेल समारोहों में इस महिला बैंड पार्टी ने अपनी काबिलियत का सिक्का जमा लिया। शादी विवाह, जन्म दिन की पार्टियों में इस बैंड को बुलाया जाने लगा। आमदनी बढ़ने लगी। पहले मजदूरी करने पर 100-150 रुपये मिलते थे। बैंड पार्टी में शामिल होने के बाद एक महिला को रोजना 500 रुपये मिलने लगे। जब महिलाएं अपने घर में पांच रुपये देने लगीं तो परिवार वालों के सोचने का नजरिया बदल गया। घर में इनकी पूछ बढ़ गयी।

अब सरगम महिला बैंड की सदस्यों के बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं। दलित बस्ती में रहने के बावजूद उनका जीवन स्तर अच्छा हो गया है। जो पहले हंसते थे अब उनकी बड़ाई करते नहीं थकते। यह बदलाव, इन महिलाओं के अटल इरादों की जीत की कहानी है।

Source: Live Bihar

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here