अमित शाह के अपमान से तिलमिलाए प्रशांत किशोर पलटवार के लिए मिले थे नीतीश से

राजनीति

बिहार में जदयू और भाजपा की सरकार बनने के बाद चर्चित चुनावी ऱणनीतिकार प्रशांत किशोर पर्दे के पीछे चले गये हैं। भाजपा और नीतीश कुमार के मेल से प्रशांत किशोर असहज हैं । प्रशांत किशोर अब अमित शाह का सामना कैसे कर पाएंगे ? 2014 में अमित शाह ने जिस तरह प्रशांत किशोर को अपमानित किया था, उस वाकये को वे शायद ही कभी भूल पाएंगे।

2019 के लोससभा चुनाव के लिए अमित शाह ने बिहार भाजपा के प्रमुख नेताओं को गुरुमंत्र देना शुरू कर दिया है। बिहार भाजपा की कोर कमेटी के साथ उनकी बैठक हो चुकी है। अब प्रशांत किशोर का क्या होगा ?

प्रशांत किशोर भले बिहार से गायब हों लेकिन नीतीश ने अभी भी उन्हें अपनी टीम से अलग नहीं किया है। जदयू अब एनडीए का हिस्सा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह क्या प्रशांत किशोर से हिसाब चुकता करेंगे ?

प्रशांत किशोर नरेन्द्र मोदी का साथ छोड़ कर आखिर नीतीश कुमार के साथ क्यों आये ? 2014 को लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर नरेन्द्र मोदी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार थे। मोदी को प्रशांत किशोर पर तब से भरोसा था जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री था। मई 2014 में लोकसभा चुनाव में जब भाजपा को अकेले बहुत मिल गया तो प्रशांत किशोर की पूछ बढ़ गयी।

लेकिन इस चुनाव परिणाम ने अमित शाह को भी भाजपा में हीरो बना दिया था। अमित शाह ने निजी तौर पर कभी प्रशांत किशोर को अहमियत नहीं दी। चुनाव परिणाम के एक महीने गुजर गये लेकिन प्रशांत किशोर को कोई पद नहीं मिला। इससे नाखुश प्रशांत ने एक दिन अमित शाह से पूछा, जून भी आ गया। अब आगे क्या होगा ?

इस पर अमित शाह ने बड़ी मासूमियत से कहा कि जुलाई आएगा और क्या होगा ? इतना कहने के साथ अमित शाह ने जोर का ठहाका लगाया। प्रशांत किशोर दरअसल अपने लिए कोई लाभ का पद मांग रहे थे लेकिन अमित शाह ने उनका मजाक उड़ा दिया।

कहा जाता है कि अमित शाह किसी को अपमानित करने के लिए जोर का ठहाका लगा कर अपनी बात कहते हैं। अमित शाह के इस अपमान के बाद प्रशांत ने भाजपा से किनारा करने का मन बना लिया।

इस घटना के बाद प्रशांत किशोर ने मन ही मन ठान लिया था कि अब किसी तरह भाजपा को जवाब देना है। 2015 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के संदर्भ में प्रशांत किशोर ने यह अनुमान लगा लिया था कि नीतीश भाजपा को मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं।

चुनाव से पहले जब नीतीश दिल्ली गये तो एक प्रमुख नेता के जरिये प्रशांत किशोर की उनसे मुलाकात हुई। फिर नीतीश ने प्रशांत किशोर को इलेक्शन कैम्पेन का प्रमुख बना दिया। 2015 में नीतीश-लालू जीते। भाजपा की करारी हार हुई। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की भद्द पिट गयी।

नीतीश ने खुश हो कर प्रशांत किशोर को कैबिनेट मंत्री के स्तर का ओहदा दे दिया। लेकिन प्रशांत पिछले कुछ समय से बिहार से ओझल हैं। यूपी में कांग्रेस की हार के बाद प्रशांत की साखा को भी बट्टा लग गया।

 

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