मोदी मंत्रिपरिषद विस्तार के बीच अमित शाह ने किया पशुपति कुमार पारस को फोन, सियासी हलचल बढ़ी

राजनीति

गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के संगठन महामंत्री के बीच मुलाकात के बाद अब यह तस्वीर साफ होती दिख रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी कुछ दिनों में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का विस्तार कर सकते हैं. जानकारी के अनुसार, 8 जुलाई तक के लिए पीएमओ ने अधिकतर मीटिंग भी टाल दिए हैं. जाहिर है मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावनाओं के साथ ही दिल्ली के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी सियासी हलचल तेज हो गई है. सियासी गलियारों में चल रही चर्चा के अनुसार मोदी कैबिनेट विस्तार में बिहार से तीन मंत्री शपथ ले सकते हैं. इनमें सुशील कुमार मोदी और लोजपा के सांसद पशुपति कुमार पारस का नाम सबसे आगे है. तीसरा नाम जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह का है जो केन्द्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बीच दिल्ली गए हैं.

इन तीनों में सबसे चौंकाने वाला नाम पशुपति कुमार पारस का हो सकता है. ऐसी बातें इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि बताया जा रहा है कि गृह मंत्री सह भाजपा नेता अमित शाह ने पशुपति कुमार पारस को फोन किया था. पशुपति कुमार पारस ने भी अमित शाह के फोन आने की पुष्टि कर दी है, लेकिन मंत्रिपरिषद विस्तार की बातों पर चर्चा से इनकार किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बीच लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति पारस ने सोमवार को कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का फोन आया था. उन्होंने फोन कर स्वर्गीय राम विलास पासवान को श्रंद्धांजलि दी. उनसे मंत्रिपरिषद विस्तार पर कोई बात नहीं हुई है.

बहरहाल सियासी गलियारों में तो यही चर्चा है कि एक-दो दिन में केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है और बताया जा रहा है कि पशुपति पारस को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रिपरिषद में शामिल होने की सूचना फोन कर दे भी दी है. ऐसे में एनडीए में चिराग पासवान के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल यह कि क्या चिराग पासवान अब एनडीए का हिस्सा नहीं रहेंगे?

चिराग ने चंद दिनों पहले ही कहा था कि अगर लोजपा नेता के तौर पर पशुपति कुमार पारस को एनडीए सरकार में शामिल किया जाता है तो वह उन्हें मंजूर नहीं होगा. हां, निर्दलीय या स्वतंत्र तरीके से वे शामिल होते हैं तो उस पर उन्हें आपत्ति नहीं होगी. अब देखना दिलचस्प रहेगा कि पीएम मोदी अपने ‘हनुमान’ के साथ क्या सलूक करते हैं. सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या चिराग पासवान आने वाले समय में केंद्रीय एनडीए से बाहर हो जाएंगे.

वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के कैबिनेट में शामिल होने पर और मंत्रियों की संख्या पर अभी बहुत कुछ स्पष्ट होना बाकी है. दरअसल, जेडीयू कैबिनेट विस्तार में आनुपातिक प्रतिनिधित्व चाहती है, पिछली बार भी इसी वजह से जेडीयू कैबिनेट विस्तार में शामिल नहीं हो सकी थी. हालांकि, इस बार आरसीपी सिंह के मंत्री पद की शपथ लेने की चर्चा जोरों पर है, पर मुंगेर से सांसद ललन सिंह और पूर्णिया के एमपी संतोष कुशवाहा के नाम भी चर्चा में शामिल हैं.

बहरहाल मोदी मंत्रिपरिषद में इन नामों के शामिल होने की चर्चा के बीच खबर यह भी है कि भाजपा के किसी एक मंत्री का पत्ता भी कट सकता है. अब देखना दिलचस्प रहेगा कि आखिर बिहार के किन नेताओं को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने का मौका मिलता है और किसका पत्ता कटता है. साथ ही यह भी कि क्या जेडीयू अपनी पुरानी मांग के साथ ही अड़ी है या उसके स्टैंड में बदलाव होगा. ऐसे भी माना जा रहा है कि इस बार भाजपा चुनावी राज्यों पर अधिक फोकस कर सकती है.

वर्ष 2019 में मोदी के दूसरी बार सरकार बनाने पर बिहार से लोजपा केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुई थी, जबकि जदयू ने भाजपा से मिला आफर ठुकरा दिया था. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के बाद लोजपा भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर हो गई. इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्‍तार की सुगबुगाहट शुरू होते ही बिहार से जदयू, लोजपा के अलावा भाजपा के भी नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि कौन होगा भीतर और कौन होगा बाहर?

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