धार्मिक मान्यता को मिला वैज्ञानिक आधार, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा रामसेतु है शानदार मानव उपलब्धि

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भारत और श्रीलंका के बीच बने एडम्स ब्रीज़ यानी कि रामसेतु को अब देश भर के वैज्ञानिकों ने मानवनिर्मित मानना शुरू कर दिया है। अबतक इस बात पर वैज्ञानिकों की भी बहुत दो दो राय होती थी और बहुत इसे प्राकृतिक घटनाओं से निर्मित बताते थे। लेकिन नासा के वैज्ञानिकों ने माना कि रामसेतु प्राकृतिक नहीं मानवनिर्मित है।

उनका मानना है कि रामेश्वरम के करीब स्थित पमबन और श्रीलंका के मन्नार के बीच जो 50 किमी लंबी सेतु बनी है उसमें इस्तमाल पत्थर कहीं और से लाई गई है। इन चीज़ों को डिस्कवरी चैनल के प्रोमो में दिखाया गया जिसे 16 घण्टों में अब तक 11 लाख लोग देख चुके हैं।


वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट के जरिये देखा कि गहरे समुद्र में तैरते चट्टान चूना पत्थर हैं। उनके अनुसार बलुई परत प्राकृतिक हो सकती है लेकिन समुद्र में इतने विशाल चूना पत्थर का होना कतई प्राकृतिक नहीं हो सकती है। वैज्ञानिकों ने दो परत के बीच की उम्र को भी अपने शोध से खोज निकाला। उनका मानना है कि ऊपर की बलुई परत 4 हज़ार साल पुरानी है लेकिन नीचे की चूना पत्थर वाली परत 7 हज़ार साल पुरानी है।


भले ही भारत में इस बात का विरोध हो या लोग न माने की रामसेतु सच में था लेकिन विदेश के भूगर्भ वैज्ञानिकों और आर्कियोलाजिस्ट की टीम ने सेटेलाइट से प्राप्त चित्रों, सेतु का स्थल, पत्थरों और बालू का अध्ययन करने के बाद इन चीज़ों को स्पष्ट कर दिया है कि रामसेतु के निर्माण के संकेत मिलते हैं। इससे जाहिर होता है कि वह था और वैज्ञानिकों ने इसे एक शानदार मानव उपलब्धि करार दिया है।

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