राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से संगम स्नान के लिए चली 64 टन वजनी श्री हनुमान मूर्ति की यात्रा 18 वें दिन गुरुवार की रात में प्रयागराज पहुंची। शुक्रवार की सुबह बांध स्थित लेटे हनुमान मंदिर परिसर में रखी गई प्रतिमा का गंगाजल से महास्नान कराया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच गंगाजल से अभिषेक के दृश्‍य को देखने के लिए सैकड़ों की संख्‍या में वहां श्रद्धालु मौजूद रहे।

पूजन-अर्चन के लिए उमड़ पड़े भक्‍त

हालांकि प्रतिमा के वजन को देखते हुए इसे संगम घाट पर न ले जाने का निर्णय लिया गया। प्रतिमा को बांध स्थित लेटे श्री हनुमान की प्रतिमा के बगल में रात्रि विश्राम कराया गया। इस दौरान वहां मौजूद मंदिर के पुजारियों व सेवादारों की भीड़ ने पूजन-अर्चन किया।

जगह-जगह होते हुए प्रतिमा प्रयागराज पहुंची

संकट मोचन मंदिर भीलवाड़ा के महंत बाबू गिरि ने बताया कि श्री हनुमान की प्रतिमा को प्रयाग में संगम स्नान कराने का संकल्प लिया गया था। पूजन, हवन कराकर यात्रा की रवानगी नौ फरवरी को हुई थी। यात्रा नागदौरा, उदयपुर, चित्तौडग़ढ़, विजौलिया, कोटा, बारा, शिवपुरी, झांसी, कानपुर और फतेहपुर जिला होते हुए प्रयागराज लाई गई। बताया कि आने और आने में कुल 2100 किमी की दूरी तय होगी। प्रतिमा पत्थर की एक ही शिला से निर्मित है। यह 28 फीट लंबी और 12 फीट चौड़ी प्रतिमा है।

प्रतिमाओं के मिलन का दुर्लभ संयोग

इसे दुर्लभ संयोग ही कहेंगे कि बंधवा स्थित लेटे श्री हनुमान के ठीक बगल में 28 फीट लंबे एक और श्री हनुमान ने रात्रि विश्राम किया। हालांकि दोनों प्रतिमाओं की कोई तुलना नहीं है लेकिन नजारा अदभुत और अविस्मरणीय ही रहा।

स्वामी नरेंद्र गिरि करेंगे पूजन

भीलवाड़ा से लाए गए हनुमान जी का शुक्रवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि पूजन करेंगे। संगम से जल लाकर श्री हनुमान की प्रतिमा को वहीं पर स्नान कराया जाएगा, जहां उन्हें रात्रि विश्राम कराया गया।

40 लोगों की निगरानी में उठी प्रतिमा

महंत बाबू गिरि ने बताया कि इस प्रतिमा को 60 फीट लंबे ट्राला पर रखने के लिए आठ घंटे लग गए। इस कार्य में पूरी सावधानी बरती गई और 40 लोगों की निगरानी में क्रेन से प्रतिमा उठाई गई।

Sources:-Dainik Jagran

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here