दिनभर एमसीडी में करते हैं नौकरी, फिर शाम को बस्ती के बच्चों को सिखाते हैं अंग्रेजी

प्रेरणादायक

जहां लोग पैसे के लिये हत्या कर देते हैं, चोरी-बेईमानी करते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो सेवा भाव से लोगों की मदद करते हैं, ऐसे ही एक 43 वर्षीय शख्स हैं डॉ. अजय कुमार, जो खुद एमसीडी में नौकरी करते हैं, नौकरी के बाद वो रोजाना शाम को दो घंटे गरीब बच्चों को पढाते हैं। ये क्लास वो साल 2012-13 से चला रहे हैं, शुरुआत में उनके पास 60 बच्चे आते थे, लेकिन कई बच्चों को उन्होने पढाकर स्कूल में दाखिला करवा दिया, डॉ. कुमार खुद एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं, साल 2006 में काम की तलाश में दिल्ली आये थे, तब से नंद नगरी में रह रहे हैं, शुरुआत में वो एक चैरिटेबल ओपीडी में काम करते थे, बाद में एक सोसाइटी अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर के तौर पर लग गये।

बच्चों से खास लगाव
साल 2008 में वो लखनऊ जाकर वहीं काम करने का मन बना रहे थे, तभी उन्हें एमसीडी के स्कूल हेल्थ स्कीम में नौकरी मिल गई, जहां उन्हें बच्चों के इलाज का जिम्मा मिला, यहां ज्यादातर पिछड़े और गरीब परिवार के बच्चे आते थे,

कुछ समय बाद उन्होने अपने घर पर बच्चों का मुफ्त इलाज शुरु कर दिया, इसी दौरान उन्हें कुछ बच्चों से लगाव हो गया, उन्होने उन बच्चों को सक्षम बनाने का फैसला लिया, जिसके बाद उन्होने नंद नगरी में किराये पर एक कमरा लिया, और कुछ बच्चों को इक्ट्ठा कर पढाना शुरु किया, जो बच्चे पहले गलियों में गालियां सीखा करते थे, वो इनके पास आकर डॉक्टर, इंजीनियर बनने की बात कर रहे हैं।

इन शर्तों पर दाखिला
डॉ. अजय सर की क्लास में दाखिला लेने की कुछ शर्ते भी हैं, सबसे पहली शर्त है कि उम्र 7 से 15 साल के बीच हो, 20 तक पहाड़े और अंग्रेजी का एल्फाबेट आता हो, इसके साथ ही अंग्रेजी और हिंदी की पांच-पांच कविता कंटस्थ याद हो।

इन शर्तों को पूरा करने वाले बच्चों को तुरंत एडमिशन मिल जाता है, नहीं तो ये चीजें तैयार कर दुबारा आने के लिये कहा जाता है।

खुद उठाते हैं खर्चा
अजय कुमार ने जो कमरा किराये पर लिया है, उसका किराया बिजली बिल मिलाकर करीब 6 हजार रुपये तक हर महीना आता है, इसका भुगतान वो अपने वेतन से करते हैं, उन्होने बताया कि ऑफिस में जन्म-मृत्यु पंजीकरण में हेड की जिम्मेदारी है,

शाम साढे पांच बजे तक छुट्टी हो जाती है, फिर 6 बजे से 8 बजे तक इन बच्चों को पढाता हूं, उसके बाद रात 9 बजे तक घर पहुंच जाता हूं। बेटी कॉलेज में है, और बेटा 8वीं में है, बेटे को बेटी ही पढाती है, रोजाना 13 घंटे घर से बाहर रहता है, लेकिन पत्नी और बच्चों का पूरा सहयोग मिलता है।

ये भी देते हैं साथ
डॉ कुमार के सहयोगी रामपाल राठौर सप्ताह में तीन दिन बच्चों को गणित पढाते हैं, अजय कुमार एमसीडी में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के कर्ता-धर्ता हैं, तो राठोर एमसीडी के रोहिणी जोन के मच्छरों की प्रजाति और उसके प्रभाव पर नजर रखते हैं।

अजय कुमार ने बताया कि राठोर मेडिकल रिप्रजेंटेटिव के तौर पर उनके पास आते थे, जब उन्हें पता चला कि वो बच्चों को पढाते हैं, तो उन्होने खुद ऑफर किया, कि सप्ताह में तीन दिन शाम साढे सात से साढे आठ वो भी बच्चों को पढाना चाहते हैं। अजय कुमार ने कहा कि अब ये बच्चे ड्राइवर-मैकेनिक नहीं बल्कि डॉक्टर-इंजीनियर बनना चाहते हैं।

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