आईटी इंजीनियर बनने के बाद गुरु को दी एक रुपया गुरु दक्षिणा

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Patna: NIT से पढ बना इंजीनियर, बिहार सरकार में अब बन चूका है ऑफिसर, ऑफिसर बनने के बाद अपने गुरु को दिया 1 रूपया गुरु दक्षिणा, गुरु ने आशीर्वाद देते हूऐ कहा कि आप जैसे स्टूडेंट्स पर गर्व है। बिहार राज्य के रोहतास जिले के बिक्रमगंज के राजेश की स्टोरी है प्रेरणा दायक। आप भी पढ़े कैसे हिन्दी मीडियम के सरकारी स्कूल में पढने वाला किसान का बेटा बना इंजीनियर।

राजेश के पिता का नाम शिवजी पाल है और इनके दादा का नाम एकराम प्रसाद है। राजेश की सफलता में उसके मेहनत के साथ उनके चाचा लालबाबू कुमार और गुरु आरके श्रीवास्तव का बहुत बड़ा योगदान है। उन दिनो राजेश की परिवारीक स्थिति उतनी बेहतर नही थी, चाचा लालबाबू ( जो अभी बिहार पुलिस में है) ने राजेश के पढ़ाई में उसे काफी सपोर्ट किया। परन्तु समय बदला परस्थितियां बदला तो आज राजेश इंजीनियर बन आईटी मैनेजर के पद पर कार्यरत है। आपको बताते चले की बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (सामान्य प्रशासन विभाग) बिहार द्वारा आई टी मैनेजर पोस्ट के लिए 2017 में बहाली निकला था जिसमें GATE के स्कोर के आधार पर चयन हुआ ।

आई टी मैनेजर का पोस्ट बिहार के सभी विभागों एंड सभी जिलों में है ।अभी राजेश भोजपुर जिला में पोस्टेड है। राजेश के इंजीनियर बनने के बाद अब परिवार की स्थिति पहले से बेहतर हुआ। राजेश बचपन से हिन्दी मीडियम के सरकारी स्कूलों से पढा। राजेश अपने गाँव बिक्रमगंज से पढकर इंजीनियर बना। आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक संस्थान में उनके सानिध्य में पढकर सफलता पाया।

राजेश Bcece प्रवेश परीक्षा में सफलता पाकर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज मोतिहारी से COMPUTER SCIENCE AND ENGINEERING ब्रांच से पढकर बिटेक किया। फिर उसके बाद GATE QUALIFIED करने के बाद NIT HAMIRPUR HIMACHAL Pradesh से पढकर MTECH की पढ़ाई पुरी किया। राजेश का परिवार हमेशा गुरु आरके श्रीवास्तव की प्रशंसा करते नही थकते जिसने उसे इंजीनियर बनने के लिये प्रेरित किया। राजेश की सफलता पर उसके दादा और पापा ने आरके श्रीवास्तव को दिया 1 रूपया गुरु दक्षिणा । आरके श्रीवास्तव ने उनके दादा और पापा को साँल भेट कर सम्मानित किया।

आरके श्रीवास्तव भी राजेश के संघर्षो को एक प्रेरणा बताते है, आरके श्रीवास्तव ने बताया की जब फ़ोन पर राजेश से बात हुआ तो मैने बोला राजेश कितने बार क्लास में आपको मैने पीटा है उसने बोला सर कितने बार तो याद नही है पर पिटाई हुआ है। राजेश ने बताया की कैसे सर आप पूरी रातभर लगातार हमलोगों को पढाते थे , कब रात से सुबह हो जाता पता ही नही चलता था। आज आपके द्वारा कराये गये मेहनत का ही देन है की हम इस उपलब्धी तक पहूँचे है।

आरके श्रीवास्तव ने कहा आप जैसे स्टूडेंट्स पर काफी गर्व होता है जो अपनी मिट्टी से आज भी जुड़े है। आप देश के उन सभी स्टूडेंटस के लिये रॉल मॉडल जो गाँव में कम सुविधा में रहकर भी इंजीनियर बनने का सपना देखते है और उस सपने को साकार करते है।

Source: The भारत टाइम्स

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