…जब लता के ‘‘ऐ मेरे वतन के लोगों ’’ के गाने पर छलक पड़े प्रधानमंत्री नेहरू के आंसू

जानकारी

स्वर कोकिला लता मंगेशकर के द्वारा गाया गया गीत ‘‘ऐ मेरे वतन के लोगों’’ आज भी जब लोग सुनते हैं तो बरबस ही उनकी आंखें नम हो जाती हैं। स्वर कोकिला ने जब यह गाना गाया था तो हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू छलक पड़े थे लेकिन शायद कुछ ऐसे भी लोग हैं जो यह नहीं जानते कि इस गाने का जन्म कैसे और क्यों हुआ? जानकारों की मानें तो 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारत की बुरी हार के बाद पूरा देश शोक में डूबा हुआ था। पूरे देश का मनोबल गिरा हुआ था। ऐसे में देश के मनोबल को ऊंचा उठाना काफी अहम हो गया था। इस काम को करने के लिए फिल्म जगत और कवियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्तमान सरकार की आशा अब फिल्‍म जगत के ही ऊपर टिकी हुई थी। सरकार की तरफ से फिल्म जगत को कहा जाने लगा कि ‘‘भई अब आप लोग ही कुछ करिए’’। कुछ ऐसी रचना करिए कि पूरे देश में एक बार फिर से जोश आ जाए और चीन से मिली हार के गम पर मरहम लगाया जा सके। दोबारा हमारे देश के लोगों में स्फूर्ति का एहसास हो और इस गम से वह बाहर निकलें। सरकार के इस सुझाव पर अमल करते हुए कवि प्रदीप ने इसमें अहम रोल निभाया।

वे जानते थे इसके लिए उन्हें कुछ मिलने वाला नहीं हैं फिर भी उन्होंने देशवाशियों के मनोबल को ऊंचा उठाने के लिए एक गीत ‘‘ऐ मेरे वतन के लोगों’’ लिखा। इसको स्वर से संवारा स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने। इससे पहले भी प्रदीप कई देशभक्ति के गाने लिखे चुके थे। हम आपको बता दें कि उस दौर में तीन महान आवाजें हुआ करती थीं। जिसमें मोहम्मद रफ़ी, मुकेश और लता मंगेशकर प्रमुख थे।

प्रदीप जानते थे कि लता की आवाज में वह जादू है जो लोगों को अपनी ओर खींच सकता है इसलिए उन्होंने लता से आग्रह कर इस गाने में स्वर देने को कहा। जैसा कवि प्रदीप ने सोचा ठीक वैसा ही हुआ। लता मंगेशकर ने इस गीत को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के अवसर पर रामलीला मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में गाया।

स्वर कोकिला के मखमली आवाज ने पूरे देश का ध्‍यान गाने की ओर खींच लिया। प्रदीप ने पहले से ही लता की आवाज को देखते हुए यह भावनात्मक गाना लिखा था। इस तरह से ‘‘ऐ मेरे वतन के लोगों’’ गीत का जन्म हुआ। जिसे लता ने पंडित जी के सामने गाया और उनकी आंखों से भी आंसू छलक आए थे। ये गीत 1962 के चीनी आक्रमण के समय मारे गए भारतीय सैनिकों को समर्पित था।

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