*काश!मान लेते आप मुझे अपनी बेटी अपनी बहन,मेरी अस्मिता लुटने से पहले।*

कही-सुनी जागरूकता

बलात्कार होते ही वह देश की बेटी बन जाती हैं।वह हिन्दू,मुस्लिम,दलित और सवर्ण बन जाती हैं अस्मिता लुटटे ही।नेताओं के लिए प्रचार का साधन बन जाती हैं,न्यूज के लिए एक ऐसी कहानी जिसे कुछ दिनों तक दिखाया जा सकता है।इस देश की आवाम भी तो घर बैठे समाचार चैनलों पर उस बिटिया का हाल जानना चाहते हैं,घर बैठे ही उस वहशी दरिन्दे,प्रशासन एवं सरकार पर भारास निकालना होता हैं उन्हें।कुछ दिनों तक यह दिखावा चलता है।विरोधों का झूठा दौरे कुछ दिनों तक चलता है और हद तो यह है की बहुत से लोगों इन सब बातों का कोई फर्क भी नहीं पड़ता उन्हें इन बेटीयो के लिए कुछ करना समय की बर्बादी लगती हैं।

हा तो,कुछ दिनों बाद शोर थम जाता हैं।खुद को जिन्दा आवाम कहने वाले वनवास पर चले जाते हैं।बुद्धिजीवीयो की बुद्धि बड़े-बड़े सेमिनारों तक ही सीमित रह जाती हैं।नेताओं को तब तक कोई ओेेर नया एवं मजेदार मुद्दा मिल जाता है राजनीति करने के लिए।न्यूज वाले फिर से वही घिसि-पिटि बहसों में लग जाते हैं।

अगर कुछ नहीं बदलता है तो वह है इन वहशी दरिन्दो की दरिन्दगि।दिन-प्रतिदिन यह बढ़ते ही जाता हैं।बेटीया नोच ली जाती हैं,दबोच ली जाती हैं।जो हाथ एक मा के स्तनों से बचपन में खेला करता था,उसके रसपान से मिली ताकत से आज उसी स्तन को नोच देते उसको तनिक भी लज्जा महसूस नहीं होती हैं।जिसने इस दुनिया को देखने का अवसर दिया 9 महिने गर्भ में रखा ओेेर एक असहनीय दर्द के बाद इस दुनिया में लाया आज उसी महिला समाज के अस्तित्व मिटाने में लग गए हैं ए हेेवान।समाज के कुछ ठीकेदार मोबाइल रखने,छोटे कपड़े पहनने,देर रात तक बाहर रहने,लड़को के बिच रहने वाली लड़कीयो के चरित्र पर सवाल उठाने वाले अब यह बता दे की यह फूल की कली सि मासूम बच्चियों के साथ हुए कुकर्म के लिए किन चीजों को जिम्मेवार बतावगे ।आखिर कहा सुरक्षित हैं बिटिया?किस पर विश्वास करें?कोन रक्षा करेगा इन जन्मदाताओं को? रोड से लेकर घर तक यह तार-तार करती नज़रों ओेेर गन्दे टच का हर रोज शिकार होती हैं।

बेटीया अब गर्भ में नहीं जिते जी बीच सड़क पर मार दी जाती हैं।आखिर अब कोन बेटी को जन्म देने की हिम्मत जुटा पाएगा।

सुन लीजिए,चुप नहीं रहिए पता नहीं कब किसकी बारी।अगर बेटी की अस्तित्व मिटेगि तो यह समाज खुद-ब-खुद मिट जाएगा। ओेेर बेटियों अपने बल पर इस देश की बेटी बन जाएगी।बस आप उसे अपनी बहन बेटी मान लीजिए।

By-आदर्श

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