अब नेपाल में एंट्री के लिए भारतीयों को दिखाना होगा पहचान पत्र, पड़ेगा बेटी-रोटी के रिश्तों पर असर

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भारत और नेपाल के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध सदियों से कायम है। दशकों पुराने रोटी-बेटी के रिश्ते में नए-नए नियमों की दीवार खड़ी हो रही है। पड़ोसी देश से रिश्तों के कायदे बदलने का असर दोनों के मध्य होने वाले कारोबार पर भी असर पड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। पहचान पत्र लेकर ही भारतीय नागरिका का नेपाल में प्रवेश करने का जो नियम बनाया गया है, इससे दोनों देशों के नागरिकों को परेशानी बढ़ सकती है।

सीमा पर बसे कमलपुर पंचायत के पूर्व मुखिया राम सेवक कामत बताते हैं कि पहले बड़े पैमाने पर सीमा के उस पार भी खेतीबाड़ी के लिए लोग आते-जाते थे। भारत के कई लोगों ने नेपाल में जमीन में खरीद रखी है। जैसे-जैसे नेपाल में कानून सख्त होते गया खेतीबाड़ी का सिलसिला थमता चला गया। पिछले दो साल से यह परिस्थिति तेजी से बदली है।

कुनौली पंचायत के मनोज कुमार सिंह का कहना है कि दो साल पहले तक बेटी-रोटी के रिश्ते में काफी प्रगाढ़ता थी लेकिन जैसे-जैसे नेपाल सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर नियम कानून बदल रहा है इससे लगता है कि अब पहले वाला नेपाल नहीं रहा। अब भारतीय लोग नेपाल के बजाय भारतीय क्षेत्र में ही अपने बेटे-बेटियों की शादी करना चाहते हैं।

यातायात शुल्क और नागरिकता कानून की अड़चन
दो साल पहले नेपाल में नया कानून बना। वहां शादी होने के बाद महिला को होने वाले संतान पर भी नेपाली नागरिकता पर पाबंदी लगा दी गई थी। इससे रिश्तों में गिरावट आ रही है। सप्तरी जिला के राजबिराज व्यापार संध के अध्यक्ष लालू अग्रवाल ने बताया कि नेपाल की टैक्सेशन नीति से भारतीयों का कारोबार प्रभावित हुआ है। नेपाल ने पिछले साल आयात शुल्क थोप दिया। धान-गेहूं पर आयात शुल्क तीन कर दिया है वहीं चावल, आटा आदि पर 8 रुपया किया गया है।

अब लाखों में सिमटा करोड़ों का कारोबार 


दो-तीन साल पहले सुपौल जिला के इंडो-नेपाल सीमा से सटे कुनौली, भीमनगर, वीरपुर, लौकही, आंध्रामठ सहित अन्य छोटे बड़े बाजारों में प्रतिदिन करोड़ों का कारोबार होता था लेकिन अब लाखों में सिमट गया है। राजबिराज और हनुमाननगर बाजार एक-दूसरे के लोगों से पटा रहता था। नेपाल के लोग भारत से चावल, दाल, चीनी, नमक, सरसों तेल सहित अन्य सामग्री यहां से ले जाते थे लेकिन बदल रहे नये नियम कानून  से कई ने रोजगार बदल लिए।

अब कम ही गूंजती है सीमा पर शहनाई
नेपाल में बदलते नियम कानून से अब रिश्ते में भी दरार पड़ने लगा है।  साल 2020, 2021 और 2022 में शादी विवाह में 90 फीसदी तक की गिरावट आई। राजबिराज भंसार कार्यालय के अधिकृत दीपेन्द्र कुमार झा बताते हैं फरवरी से जून तक चार से पांच सौ की संख्या में दूल्हा-दुल्हन का प्रवेश होता था। अब वैसा नजारा बिल्कुल नहीं देखने को मिलता है। 40-50 शादियां बमुश्किल इस साल हुईं। एपीएफ तिलाठी चौकी के इंस्पेक्टर सुशील केसी बताते हैं कि सीमा पर जांच करना अनिवार्य है और पहचान पत्र देखना भी जरूरी है। वैसे भी भारतीय लोगों को आने-जाने में कोई भी परेशानी नहीं है।

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