अब घर बैठे ही बनवा सकेंगे जाति-आय और आवास प्रमाणपत्र, जानिए तरीका

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बिहार के अंचल कार्यालयों में जाति, आय, आवास प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर हो रही भीड़ और परेशानी को देखते हुए अब प्रशासन ऑनलाइन व्यवस्था पर विशेष बल दे रहा है। अब घर बैठे ही जाति, आय और आवास प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा उपलब्ध हो गई है।

इस वर्ष 21 लाख 44 हजार लोगों ने आवेदन किया था, इसमें 65 प्रतिशत लोग ऑनलाइन आवेदन दिए हैं। आगे आरटीपीएस काउंटर की बजाय ऑनलाइन प्रमाण पत्रों को बनाने के लिए आवेदन और उसे निष्पादन कर ऑनलाइन डाउनलोड करने की शत-प्रतिशत सुविधा उपलब्ध करने की योजना है। सोमवार को डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह इस विषय पर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। पहली जनवरी 2021 से 25 दिसंबर 2021 के बीच पटना जिले के सभी अंचल कार्यालयों में जाति, आय, आवास के लिए 21 लाख 44 हजार 466 लोगों ने आवेदन दिया था। इनमें 21 लाख 11 हजार 902 आवेदन को स्वीकार किया गया।

 

आवेदनों को सत्यापन करने के बाद इस वर्ष 19 लाख 25 लाख 70 लोगों का प्रमाण पत्र जारी किया गया है, जो कुल आवेदन का 89 प्रतिशत है। एक लाख 86 हजार 832 लोगों का आवेदन विभिन्न कारणों से रिजेक्ट कर दिया गया था, जो कुल आवेदन का नौ प्रतिशत है। ऑनलाइन आवेदन करने वालों की संख्या 65 प्रतिशत तथा आरटीपीएस काउंटर पर फॉर्म जमा करने वालों की संख्या 35 प्रतिशत रही। पटना जिले में प्रतिमाह 28 से 30 हजार आवेदन आ रहे हैं।

 

पहले आवेदन के लिए लंबी कतार लगानी पड़ती थी, लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह से लागू कर होने के बाद समस्या समाप्त हो जाएगी। कुछ युवाओं का कहना है कि सर्वर डाउन रहने के कारण ऑनलाइन व्यवस्था में आवेदन करने और प्रमाण पत्रों को डाउनलोड करने में परेशानी होती है। इस विषय पर सोमवार को अधिकारियों की समीक्षा होने वाली है।

आवेदन करने के लिए सर्विस एप करना होगा डाउनलोड

आवेदन करने के लिए सर्विस एप डाउनलोड करना होगा। इसे खोलने के बाद बायीं ओर आय, जाति और आवास प्रमाण पत्र के कॉलम दिये गये हैं। जो बनाना है उस पर क्लिक करके विस्तृत ब्योरा को भरें। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मोबाइल पर एक लिंक आएगा, जिस पर प्रमाणपत्र बनने के बाद क्लिक कर उसे डाउनलोड कर सकते हैं। एक प्रमाणपत्र को बनाने में एक सप्ताह से 15 दिन का समय लगता है। यदि ऑनलाइन आवेदन करने के बाद समय पर प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया तो संबंधित अंचल कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

 

आरटीपीएस काउंटर पर लोगों को कम जाना पड़े, इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। भविष्य में लोगों को शत-प्रतिशत ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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