अब 30 से अधिक संक्रमित मिलने पर जीनोम सिक्वेंसिंग कराएगी सरकार, जानें कितना आएगा खर्च और क्या है टेस्ट

जानकारी

राज्य में 30 से अधिक संक्रमितों के सैंपल मिलने पर ही जीनोम सिक्वेंसिंग जांच करायी जाएगी। हालांकि जीनोम सिक्वेंसिंग को लेकर एक बार जांच में 96 सैंपल की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय महामारी कोविड-19 के नए वैरियंट ओमिक्रोन के मिलने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने विदेश से आने वाले सभी व्यक्तियों की आरटीपीसीआर जांच कराने और संक्रमित पाए जाने पर जीनोम सिक्वेंसिंग कराने का निर्णय लिया है। इसी निर्णय के तहत जीनोम सिक्वेंसिंग कराने को लेकर कम संख्या में सैंपल की भी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

कम कोरोना संक्रमितों की पहचान को लेकर दिए गए निर्देश 

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोरोना के राज्य में कम संक्रमित मिलने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग कराने को लेकर पर्याप्त सैंपल उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कोरोना के नए वैरियंट आने के बाद संक्रमित मरीज के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग कराने में एक से दो माह लग सकता है। इसलिए विभाग ने कम से कम 30 से अधिक सैंपल एकत्र होने पर जीनोम सिक्वेंसिंग कराने का निर्देश दिया है। इससे नये संक्रमण की पहचान तेजी से हो सकेगी। 

 

एक बार जीनोम सिक्वेंसिंग में करीब 15 लाख होते हैं खर्च 

सूत्रों ने बताया कि एक बार जीनोम सिक्वेंसिंग कराने में करीब 15 लाख खर्च होता है। बिहार में कोरोना संक्रमितों की जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच सुविधा इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में है। इसके पूर्व जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल दिल्ली व हैदराबाद भेजे जा रहे थे। 

क्या है जीनोम सिक्वेंसिंग 

जीनोम सिक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का प्रोफाइल होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सिक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में जानकारी मिलती है।

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