आपकी जेब पर बढ़ेगा बोझ: एक अप्रैल से महंगी हो जाएंगी 800 तरह की दवाएं, कीमतों में होगा 10.76 प्रतिशत का इजाफा

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एक अप्रैल से दवाओं की कीमतें बढ़ जाएंगी। नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिंस (एनएलइएम) मतलब आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करीब 800 प्रकार की दवाओं की कीमतों में आगामी एक अप्रैल से 10.76 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा। इस तरह दवाएं खरीदने के लिए बीमारों की जेब पर दस प्रतिशत से ज्यादा बोझ पड़ेगा। भागलपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम दास कोटरीवाला ने बताया कि भागलपुर की दवा थोक मंडी में हर रोज दस लाख रुपये का पैरासिटामाल व 50 लाख रुपये का एजिथ्रोमाइसिन समेत अन्य एंटीबॉयोटिक्स दवाओं की बिक्री होती है।

वहीं, 40 लाख की फेनोबार्बिटोन, फिनाइटोन सोडियम, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाजोल की दवाओं की थोक में बिक्री होती है। इस तरह हर रोज औसतन एक करोड़ रुपये की इतने ही प्रकार की दवाओं की बिक्री हो जाती है। ऐसे में अगर इसी कारोबार को स्थिर मानें तो इन दवाओं को खरीदने के लिए मरीजों को अब रोज 10.76 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करना होगा। वहीं, पूरे राज्य में अभी रोजाना 40 से 50 करोड़ रुपये की पैरासिटामाल, एंटीबॉयोटिक्स, फेनोबार्बिटोन, फिनाइटोन सोडियम, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाजोल की दवाएं बिक रही हैं।

थोक मूल्य सूचकांक में आयी तेजी के कारण लिया निर्णय

दवा कारोबारियों के अनुसार, दवाओं की कीमतों में वृद्धि का फैसला थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में तेज बढ़ोत्तरी के कारण लिया गया है। ऐसे में अब बुखार, संक्रमण, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, त्वचा रोग एवं एनिमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है। इन दवाओं की सूची में पैरासिटामाल, फेनोबार्बिटोन, फिनाइटोन सोडियम, एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाएं शामिल हैं।

एनपीपीए के आदेश में कहा गया है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर दवाओं के मूल्य में 10.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी की इजाजत दी जाती है।  ड्रग (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के प्रावधानों के अनुसार यह फैसला किया गया है।

दो साल में पैरासिटामाल की कीमत में 130 प्रतिशत तक की वृद्धि

भागलपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महासचिव प्रशांत लाल ठाकुर बताते हैं कि पिछले दो साल में कुछ प्रमुख एपीआई की कीमत 15 से 130 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। पैरासिटामाल की कीमतों में 130 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। वहीं, सिरप और ओरल ड्रॉप के साथ कई अन्‍य दवाओं और मेडिकल एप्‍लीकेशन में इस्तेमाल होने वाले ग्लिसरीन के दाम में 263 प्रतिशत और पॉपीलन ग्‍लाइकोल की कीमत में 83 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गयी है। इंटरमीडिएट्स दवाओं के दाम में तो 11 प्रतिशत से 175 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। बढ़ती लागत को देखते हुए पिछले साल 2021 के अंत में फार्मा इंडस्‍ट्री ने केंद्र सरकार से दवाओं के दाम बढ़ाने का आग्रह किया था।

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