आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका को मेन्‍यू के बारे में पता नहीं, सुल्‍तानगंज का हाल…

जानकारी

प्रखंड की करहरिया पंचायत अंतर्गत गांव देवधा में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैैं। एक में 40 और दूसरे में 20 बच्चे नामांकित हैैं। दोनों ही केंद्रों को अपना सरकारी भवन है। लेकिन सुविधा के नाम पर नगण्यता है। बीते दिनों जब जागरण टीम केंद्रों में पहुंची तो दोनों का नजारा लगभग एक जैसा दिखा। केंद्र खुले थे। बच्चे नहीं थे। सहायिका अकेली बैठी समय काट रही थीं और सेविका गायब थीं। इसके अलावा, वहां और क्या था और क्या नहीं, पढि़ए…

सुबह 9.30 बजे, करहरिया पंचायत के देवधा का आंगनबाड़ी केंद्र-164

सहायिका रूबी देवी दो नौनिहालों के साथ बैठी मिलीं। सेविका सोनी भारती वहां नहीं थीं। उनको सहायिका ने फोन करके बुलाया। केंद्र में 40 बच्चे नामांकित हैैं। 38 बच्चे अनुपस्थित रहने का कारण बताया गया कि मेला के कारण नहीं आए। केंद्र में किचन है पर कोई राशन सामग्री नहीं थी। फिल्टर पानी, शौचालय, मेडिसिन किट की व्यवस्था नहीं थी। कोई भी पाठ्य-सामग्री नहीं थी। मेन्यू में क्या मिलता है इसका न बच्चों को पता और न ही सेविका या सहायिका को।

सुबह 10.03 बजे, देवधा गांव में आंगनबाड़ी केंद्र-32

सहायिका सुमा देवी आंगनबाड़ी केन्द्र पर अकेली बैठी थी। पूरा केंद्र खाली पड़ा। 20 नामांकित बच्चों में से न एक बच्चा और न ही सेविका। सुमा देवी ने भी बच्चे नहीं आने का कारण मेला बताया। यहां भी सेविका को सहायिका द्वारा फोन करके बुलाया गया। आते ही बोली कि केंद्र का ताला खोलकर घर गई थी। इस केंद्र में भी बच्चों के वर्धन, विकास, स्वास्थ्य परिमार्जन की कोई वस्तु नहीं थी। रसोई खाली रहने पर सेविका ने बताया कि यहां चूहे बर्बाद कर देते हैं इसलिए खाने-पीने की सामग्री घर में रखते हैं। बच्चों को खाने में क्या-क्या दिया जाता है सेविका इसे भी नहीं बता सकी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में जो भी समस्या हो, हमें बताएं। उस समस्या को ठीक किया जाएगा।

पुष्पा कुमारी, बाल विकास पदाधिकारी, सुल्तानगंज

आंगनबाड़ी केंद्र में समस्याएं हैैं लेकिन इसमें सहायक और सेविका गांव की ही हैैं। इसीलिए किसी को कुछ नहीं कहा जा सकता।

मुकेश कुमार, मुखिया प्रतिनिधि, करहरिया पंचायत

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