छठ में इस मुस्लिम महिला की फैमिली रहती है चर्चा में, नहीं खाते प्याज-लहसुन

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मुस्तकीमा खातून छठ से एक महीने पहले से परहेज में रहने लगती हैं। पूरा परिवार बिल्कुल सात्विक भोजन करता है। खाने में प्याज-लहसुन से भी परहेज। पिछले 10 साल से मुस्तकीमा ऐसा कर रही हैं। साथ ही हर साल किसी न किसी व्रती को सूप देकर छठी मइया का आशीर्वाद मांगती हैं। जानिए क्या है पूरा मामला…

– मुस्तकीमा हर साल कार्तिक और चैती छठ में प्रसाद बनाने के काम आने वाला मिट्‌टी का चूल्हा बनाकर बेचती हैं। – व्रत करने वाली महिलाओं को सहयोग करती हैं अौर घाट तक जाने के लिए अपना ठेला भी देती हैं। – वीरचंद पटेल पथ में चूल्हा बनाकर बेचने वाली कमला नेहरू नगर की मुस्तकीमा छठ पर्व के प्रति अपनी आस्था के जरिए धार्मिक सद‌्भाव की भी मिसाल पेश कर रही हैं। – चूल्हा बनाने के काम में बहू नजमा खातून भी सहयोग करती हैं।

पुनपुन इलाके से आती है मिट्‌टी
– मिट्‌टी के चूल्हे पर व्रती खरना का प्रसाद बनाते हैं। चूल्हे बनाने के लिए ये पुनपुन नदी के किनारे के खेतों से मिट्टियां लाते हैं। – इसे वीरचंद पटेल पथ के फुटपाथों के किनारे गिराया जाता है। दो माह पहले से ही चूल्हा बनाने का काम शुरू हो जाता है। छठ के कुछ दिन पहले से लेकर खरना तक इनकी बिक्री होती है।

बेटे के लिए व्रतियों को देती हैं सूप
– मुस्तकीमा ने बताया कि पति मो. असलम चमड़ा गोदाम में काम करते हैं और ठेला चलाते हैं, लेकिन छठ के दौरान सिर्फ एक काम चूल्हा बनाने में सहयोग करते हैं। – बेटे मो. इकबाल को सफेद दाग हो गया था। लोगों की सलाह पर सूप देकर अर्घ्य दिलवाते हैं। इस उम्मीद में कि सूर्य देवता उसकी अर्ज जरूर सुनेंगे। यह पांचवां साल है। – इस बार पांच सूप देकर अर्घ्य दिलवाने की तैयारी है। मुस्तकीमा बताती हैं कि एक चूल्हा 50-60 रुपए में बिकता है। पांच से छह हजार रुपए कमाई हो जाती है। – यही नहीं मुस्तकीमा के अलावा फूला खातून, शाहिदा खातून, मो. चांद, लाला मिया, मो. कमरू समेत करीब 20 परिवार ऐसे हैं, जो वीरचंद पटेल पथ में छठ के दौरान मिट्‌टी के चूल्हे बनाकर बेचते हैं।

Sources:-Dainik bhasakar

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