कभी कैंटीन में बर्तन धोने वाला ये शख्स आज है 70 करोड़ की फूड चेन का मालिक

सच्चा हिंदुस्तानी

सागर रत्न रेस्टोरेंट के मालिक जयराम बानन सात भाई-बहन थे। जब वे 13 साल के थे तो स्कूल में फेल हो गए। अपने पिता की मार खाने के डर से उन्होंने चुपके से पिता के पर्स से कुछ पैसे निकाले और घर से भाग कर मुंबई जाने वाली ट्रेन पकड़ ली। यहीं से शुरू हुए संघर्ष के दिन और कामयाबी की कहानी…

64 वर्षीय जयराम बानन आज भी 60 के दशक के उन दिनों को याद करते हैं, जब वे घर से भागकर मुंबई में बर्तन धोने का काम करते थे। मुंबई की एक कैंटीन में बर्तन धोकर हर महीने 18 रुपये पाने वाले जयराम आज सागर रत्न रेस्टोरेंट की चेन चलाते हैं।

यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे इस चेन से हर साल 70 करोड़ से अधिक का टर्नओवर कमा लेते हैं। उनकी कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं लगती।

जयराम का बचपन कर्नाटक के उडिपी में बीता। पेशे से ऑटो ड्राइवर उनके पिता काफी सख्त थे और परीक्षा में कम नंबर आने या स्कूल में शरारत करने पर वे बच्चों की आंख में मिर्च झोंक देते थे। जयराम सात भाई-बहन थे।

जब वे 13 साल की उम्र में थे तो स्कूल में फेल हो गए। अपने पिता की मार खाने के डर से उन्होंने चुपके से पिता के पर्स से कुछ पैसे निकाले और घर से भाग कर मुंबई जाने वाली एक ट्रेन पकड़ ली।

उनके साथ उन्हीं के गांव का एक व्यक्ति और था जो मुंबई जा रहा था। उसने जयराम को नवी मुंबई के पनवेल में स्थित हिंदुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स (HOC) की कैंटीन में काम पर लगा दिया। यहां वह बर्तन धुलते थे, जहां उन्हें सिर्फ 18 रुपये महीने के मिलते थे।

जयराम ने बर्तन धुलते-धुलते थोड़ी सी तरक्की की और बर्तन से टेबल तक पहुंच गए यानी वेटर बन गए। आठ साल तक वे वहां पर काम करते रहे और फिर हेडवेटर होते हुए मैनेजर की पोस्ट तक पहुंचे।

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