9 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष मेला, गया में 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु करेंगे पिंडदान

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पितृपक्ष मेला 9 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। गया में पितृपक्ष मेले के उद्घाटन से लेकर पिंडदान की व्यवस्था को लेकर जोरदार तैयारी की जा रही है। कोरोना की वजह से गयाजी में इस मेले का आयोजन दो साल बाद किया जा रहा है। इस साल गयाधाम में देश-विदेश से 8 लाख से ज्यादा लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने की कामना से यहां पिंडदान करेंगे। गयापालों से लेकर मेला क्षेत्र के दुकानदारों में खासा उत्साह है। जिला प्रशासन की टीम लगातार विष्णुपद इलाके का भ्रमण कर रही है। फल्गू नदी के देवघाट, गजाधर, संगत घाट से लेकर सीता कुंड पर व्यवस्था का जायजा ले रही है। प्रेतशिला से लेकर बोधगया के धर्मारण्य पर तीर्थयात्रियों को पिंडदान करने की व्यवस्था में प्रशासन जुटा है।

श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सचिव और गयापाल गजाधर लाल पाठक ने बताया कि गयाधाम में पितरों को मोक्ष दिलाने का महापर्व पितृपक्ष मेला 9 सितंबर से शुरू होगा। हालांकि गुरुवार से ही गया में तीर्थयात्रियों का आना शुरू हो जाएगा। दो साल बाद लग रहे पितृपक्ष मेले में आठ लाख से अधिक पिंडदानियों के आने का अनुमान है।

फल्गू के साथ शुरू और अक्षयवट में सुफल के साथ खत्म होगा पिंडदान

आचार्य नवीनचंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि आश्विन कृष्णपक्ष में इस बार तिथि को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं है। एक दिन में एक ही तिथि है। इस कारण तिथि के अनुसार पिंडदान की तिथि को लेकर कोई संशय नहीं है। 9 सितंबर (भाद्रपद चतुर्दशी) को पटना जिले की पुनपुन नदी या गया शहर में स्थित गोदावरी से त्रिपाक्षिक पिंडदान शुरू होगा। पुनपुन नदी में श्राद्ध करके ही गया आने का विधान है। अगर कोई सीधा गयाजी आते हैं वे यहां के गोदावरी तालाब में पिंडदान के साथ त्रिपाक्षिक पिंडदान शुरू करेंगे।

आचार्य ने बताया कि गया में 10 सितंबर को फल्गू से पिंडदान शुरू होगा। इस दिन फल्गू नदी में पिंडदानियों की भारी भीड़ होगी। 11 सितंबर को प्रेतशिला। इसी तरह विभिन्न वेदियों पर तिथिवार पिंडदान के बाद अश्विन कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि यानी 15 सितंबर से लेकर नवमी 19 सितंबर तक विष्णुपद मंदिर में 17 दिनी पिंडदान करने वाले श्राद्धकर्म करेंगे। 25 सितंबर को अक्षयवट में शैय्यादान और पंडाजी से सुफल लेने के साथ गयाश्राद्ध संपन्न होगा। त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध करने वाले 26 सितंबर को गायत्री घाट पर नाना-नानी के लिए पिंडदान करने के बाद गयाधाम से लौटेंगे।

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