8 साल बाद मुख्यमंत्री नीतीश के भोज में पहुंचे सुशील मोदी

राजनीति

बिहार की राजनीति के मौसम में भी गर्माहट आ गई है। नीतीश कुमार के भोज को लेकर दो भागों में बंटी दिखी बीजेपी।

नीतीश कुमार ने आज शाम को दोनो सदनों के सभी सदस्यों को भोज पर निमंत्रित किया। सुबह भाजपा नेता प्रेम कुमार ने भोज में शमिल नहीं होने का एलान किया था। मुख्यमंत्री के भोज में शामिल हुए सुशील मोदी ने प्रेम कुमार के भोज में नही शामिल नहीं होने पर कहा की ये उनका व्यक्तिगत फैसला है और इससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है।

नीतीश कुमार के भोज में शामिल होने को लेकर भाजपा में दो राय बन गया थी। प्रेम कुमार ने भोज में शामिल नहीं होने के अपने निर्णय पर कहा की शिक्षक पर लाठी चार्ज, होमगार्ड जवानों के हड़ताल और बिजली बिल में बेतहाशा बढ़ोत्तरी जैसे कई कारणों की वजह से उन्होंने भोज में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है। प्रेम कुमार के फैसले के बाद भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने भी भोज में जाने से इंकार कर दिया था। दूसरी ओर भाजपा सांसद जनार्दन सिग्रीवाल का मानना है की नीतीश कुमार के निमंत्रण को गंभीरता से लेना चाहिए।

जदयू का बीजेपी साथ 17 साल का संबंध रहा है। भोज के बहाने नीतीश कुमार भाजपा के करीब आना चाहते हैं और अगर भविष्य में नीतीश कुमार बीजेपी के साथ फिर से जुड़ते हैं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

9 साल पहले जिस भोज को लेकर जेडीयू और बीजेपी में तल्खी हुई थी उसे भूलते हुए बीजेपी भोज में शामिल होगी या नहीं, इस बात पर संशय था। 2009 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान नितीश कुमार और नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाले एक पोस्टर को लेकर हुए विवाद के बाद नीतीश कुमार ने भोज को रद्द कर दिया था।

साथ ही प्रेम कुमार ने 2009 के भोज का जिक्र करते हुए कहा था की उस वक्त के मिले जख्म को भूले नही हैं लेकिन परंपरा का निर्वाह करते हुए इसमें शामिल होंगे। उस वक्त जदयू ने अतिथि देवो भवः की लाज नहीं रखी थी लेकिन बीजेपी ऐसा नहीं करेगी।

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