68 वीं BPSC परीक्षा में आयोग का नया प्रयोग, अभ्यर्थियों से फीडबैक लेकर तैयार किया जाएगा एग्जाम पैटर्न

जानकारी

बिहार लोक सेवा आयोग आगामी 68वीं प्रारंभिक परीक्षा के पहले छात्रों से आवेदन के समय ही फीडबैक लेगा। आवेदन में फीड का विकल्प दिया जाएगा। आयोग ने परीक्षा के पैटर्न में बद्लाव को लेकर छात्रों की राय जानने का निर्णय लिया है। आवेदन करने वाले छात्रों के फीडबैक के बाद आम सहमति के आधार पर परीक्षा का पैटर्न निर्धारित किया जाएगा।

आयोग के अध्यक्ष अतुल प्रसाद ने बताया कि छात्रों की ओर से कुछ बदलाव को लेकर ज्ञापन दिया गया है। छात्रों ने निगेटिव मार्किंग को सही करार दिया पर इसमें 50 प्रश्नों की अलग से कैसे पहचान होगी। इसके लिए अभ्यर्थियों में संशय है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों का तर्क था कि सभी प्रश्नों को एक समान कर दिया जाए। कठिन और हल्के का प्रावधान सही नहीं है।

आयोग के अध्यक्ष ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि 68वीं परीक्षा के लिए आवेदन माह के अंत में लिया जाएगा। जनवरी में परीक्षा नहीं ली जाएगी। इसमें कुछ बदलाव संभव है। प्रारंभिक परीक्षा और लिखित परीक्षा में मार्किंग का स्केलिंग कैसे किया जाएगा। इसके लिए भी छात्रों को अपनी प्रतिक्रिया देने का मौका दिया जाएगा।

कंट्रोल रूम जिलावार व राज्य स्तरीय बनेगा-
सभी जिलों में कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। एक कंप्यूटर से न्यूनतम 10 व अधिकतम 16 परीक्षा केंद्रों की निगरानी होगी। राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों की ड्यूटी कंट्रोल रूम में लगाई जाएगी। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के लखनऊ स्थित शिविर कार्यालय में एक राज्यस्तरीय कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। यहां से सभी जिलों की निगरानी होगी।

 

हमेशा की तरह इस बार भी-
– परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षकों की व्यवस्था
-केन्द्र व्यवस्थापक कक्ष  निरीक्षक व अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी सॉफ्टवेयर के माध्यम से
– ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों का वेतन कटेगा
-बालिकाओं को स्वकेन्द्र की सुविधा, यदि यह सुविधा न दी जा सके तो यथासंभव 5 किमी के परिधि के अंदर केन्द्र बनाया जाएगा।
-40 फीसदी की दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों को स्वकेन्द्र की सुविधा, यदि संभव नहीं तो 5 किमी के अंदर केन्द्र आवंटित होगा
-बालकों को 10 किमी की परिधि में केन्द्र आवंटित होगा, अपरिहार्य स्थितियों में 15 किमी के अंदर भी केन्द्र बनेगा
-दोनों पालियों में आवंटित विद्यार्थियों की संख्या न्यूनतम 250, अधिकतम 1200

 

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