आठ राज्‍यों के किसानों को जैविक खेती के लिए बिहार से मिलेगी खास सुविधा

जानकारी

जैविक और पारंपरिक खेती से संबंधित फसलों के प्रमाणन के लिए बसोका (बिहार राज्य बीज और जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी) अब आनलाइन आवेदन लेगा। बसोका की वेबसाइट पर जाकर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बिहार के किसानों के लिए विशेष सहूलियत है कि वे कृषि विभाग द्वारा जारी निबंधन संख्या के जरिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैैं। दूसरे राज्यों के किसानों को इसी वेबसाइट पर आधार संख्या एवं अन्य ब्योरे के साथ आवेदन करना होगा, क्योंकि उनकी विस्तृत जानकारी बसोका के पास नहीं है।

पटना के मीठापुर स्थित कृषि निदेशालय परिसर में प्रमाणन एजेंसी का कार्यक्षेत्र बिहार के साथ बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, असम एवं राजस्थान है। इन राज्यों के किसान अपने जैविक, पारंपरिक और प्राकृतिक पैदावार और बागवानी उत्पादों को प्रमाणित करा सकते हैैं। बसोका बिहार में पिछले तीन सालों से काम कर रही है। पहले बिहार के किसानों को भी जैविक प्रमाणन सिक्किम से कराना पड़ता था। अब बिहार के साथ अन्य राज्यों के किसानों को आनलाइन यह सुविधा उपलब्ध होगी। एफपीओ और सामूहिक खेती कराने वाली फर्मो और कंपनियों को भी यह सुविधा मिलेगी। तय शुल्क आनलाइन जमा करने के बाद एजेंसी के विज्ञानी संपर्क स्थापित कर जांच के लिए नमूना संग्रह करने खेत पर पहुंच जाएंगे

बसोका को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के संस्थान कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा मूल्यांकन कर राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड को जैविक प्रमाणन के लिए प्रमाणन संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। अहम यह है कि बसोका डीएनए फिंगर प्रिंटिंग प्रयोगशाला में जेनेटिकली माडिफाइड आर्गेनिज्म (जीएमओ) टेस्टिंग करती है। इसकी प्रयोगशाला का विस्तार भी किया जा रहा है। इसकी प्रतिवर्ष जांच की वर्तमान क्षमता तीन सौ नमूने की है। विस्तारीकरण के बाद यह क्षमता चार हजार हो जाएगी। डीएनए फिंगर प्रिंटिंग प्रयोगशाला में जांच के बाद किसानों के उपयोग में लाए जा रहे संकर बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।

जीपीएस की मदद से सुनिश्चित की खेत की पहचान 

खेत और जैविक फसलों के प्रमाणन के लिए बसोका की टीम बाकायदा मौके पर जाकर जीपीएस की जांच करती है। मौके से मुख्यालय में लगी मशीन द्वारा यह सुनिश्चित करने का प्रविधान है कि जांच के लिए अमुक प्रदेश के अमुक जिले के अमुक प्रखंड की अमुक पंचायत के खेत से नमूना संग्रहित किया गया है। बसोका के निदेशक सुनील कुमार पंकज ने बताया कि बसोका की टीम तय शुल्क जमा करने वाले किसानों और एफपीओ के खेत पर जाकर जीपीएस के जरिए प्रमाणन एवं नमूना संग्रह की सुविधा सुनिश्चित करती है। किसानों की सहूलियत के लिए आनलाइन आवेदन सुविधा शुरू की गई है।

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