600 साल बाद बदरीनाथ धाम में चढ़ा सोने का छात्र, तस्वीर में देखें श्रद्धा की भव्य यात्रा

आस्था

पटना: 600 साल बाद बदरीनाथ धाम में भगवान नारायण के छत्र को बदल दिया गया है। बुधवार को लुधियाना के मुक्त परिवार के ज्ञानेश्वर सूद की ओर से चार किलो सोने का छत्र भगवान बदरीनाथ को अर्पित किया गया। इस दौरान सूद परिवार के लुधियाना और दिल्ली से पहुंचे 300 से अधिक भक्त बदरीनाथ की पूजा-अर्चना में जुटे रहे। हीरा और रत्न जड़ित छत्र को शाम ठीक पांच बजे बदरीनाथ गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया गया।

ज्ञानेश्वर सूद और उनके परिजन छत्र के साथ बुधवार सुबह दस बजे हेलीकॉप्टर से बदरीनाथ पहुंचे, जबकि उनके साथ आए अन्य भक्त करीब सौ वाहनों के काफिले के साथ धाम पहुंचे। छत्र को पूर्वाह्न करीब ग्यारह बजे चढ़ाया जाना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण यह कार्यक्रम शाम पांच बजे रखा गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, छत्र डोली में सजाकर सिंह द्वार पर लाया गया। इसके बाद उसे बदरीनाथ सभा मंडप में ले जाया गया। यहां धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और अन्य वेदपाठियों ने मंत्रोच्चारण के साथ संकल्प पूजा की। वेद मंत्रों की ध्वनि के साथ स्वर्ण छत्र भगवान बदरीनाथ के श्रीविगृह के ऊपर प्रतिष्ठापित किया गया।

बताया जाता है कि 600 वर्ष पूर्व ग्वालियर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने भगवान बदरीनाथ को स्वर्ण छत्र चढ़ाया था। तब से यही स्वर्ण छत्र भगवान के श्रीविगृह के ऊपर लगा था। अब यह स्वर्ण छत्र बदरीनाथ की शोभा बढ़ाएगा। स्वर्ण छत्र को देखने के लिए बदरीनाथ मंदिर परिसर में भारी संख्या में तीर्थयात्री उमड़े। तीर्थयात्रियों ने छत्र को छूकर आशीष मांगा। सूद परिवार के ज्ञानेश्वर सूद समेत उनके वृद्धजन पालकी में बैठकर बदरीनाथ मंदिर के समीप पहुंचे। इस दौरान भक्तों के जय बदरीनाथ के जयकारों से धाम गूंज उठा।

महर्षि मुक्त बदरीनाथ यात्रा शताब्दी मनाई  
लुधियाना में विगत सात अप्रैल को छत्र का अनावरण हुआ था। सात मई तक हर शनिवार को छत्र भक्तों के दर्शनार्थ रखा गया। ज्ञानेश्वर सूद के दादा गुरु महर्षि मुक्त जी ने 1918 में पहली बार बदरीनाथ की यात्रा की थी। उनकी यात्रा शताब्दी को लेकर ही सद्गुरु देव संत प्रतिमा महाराज के सानिध्य में बुधवार को महर्षि मुक्त बदरीनाथ यात्रा शताब्दी मनाई गई।

सूद बोले, उनका संकल्प पूरा हुआ है
30 वर्षों में 23 बार बदरीनाथ की तीर्थयात्रा कर चुके लुधियाना के ज्ञानेंद्र सूद का कहना है कि उनकी बदरीनाथ में अगाध श्रद्घा है। पिछले वर्ष अक्तूबर माह में उन्होंने मंदिर समिति के अधिकारियों से बदरीनाथ के गर्भगृह में दान करने की इच्छा जताई थी। मंदिर समिति ने उनसे जीर्ण-शीर्ण हुए छत्र को बदलने की बात कही। तब उन्होंने भगवान बदरी विशाल को छत्र अर्पित करने का संकल्प लिया था, जो आज पूरा हो गया है।

source: live news

Leave a Reply

Your email address will not be published.