बिहार की बेटी पहली बार ट्रेन में बैठीं और बन गईं उत्तर रेलवे की एकमात्र महिला स्टेशन मास्टर

एक बिहारी सब पर भारी

आज बी कई लोग हैं जो ये मानते हैं की लड़की है तो उसका काम है घर की चारदीवारी के अंदर ही  रहना चाहिए। लेकिन समय समय पर बेटियों ने साबित किया है की पूरा खुला आसमान उनका है। उन्ही में से एक है पिंकी।

पिंकी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उदाहरण हैं उन लड़कियों के लिए जो मुश्किल दौर से लड़ कर प्रेरणा लेते हुए मिसाल बन जाती हैं। पिंकी हमेशा से ही कुछ ऐसा करना चाहती थीं, जो दूसरों से थोड़ा अलग हो।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से बीस किलोमीटर पर कैथलीघाट नाम का एक कस्बा है। ब्रिटिश सम्राज्य के दौरान शिमला अंग्रेजों का ‘समर कैपिटल’ हुआ करता था। ऐसे में बिटिशर्स ने कालका से शिमला तक एक छोटी ट्रेन चलाई जिसे ‘टॉय ट्रेन’ कहा जाता है।

नैरो गेज़ की पटरी पर चलने वाली ये ट्रेन जितनी सुंदर है उससे कहीं अधिक दिलकश है। इसके कालका-शिमला रूट पर पड़ने वाले रेलवे स्टेशन देखते ही मन ठंडक से भर जाता है। सड़क के किनारे पहाड़ों से घिरे हुए शांत जंगल किसी फिल्मी सेट की तरह साफ-सुथरे नज़र आते हैं। इन्हीं सबके बीच है कैथलीघाट रेलवे स्टेशन।

कैथलीघाट रेलवे स्टेशन जितना अपनी शांति और खूबसूरती के लिए जाना जाता है, उतना ही यहां की स्टेशन मास्टर ‘पिंकी कुमारी’ के लिए भी जाना जाता है। इस रेलवे स्टेशन पर तैनात पिंकी की प्रेरणात्मक कहानी जन मानस के मस्तिष्क में जोश भर जाती है, जिसकी सबसे बड़ी वजह है उत्तर रेलवे के इस सेक्शन पर पिंकी का एकमात्र महिला स्टेशन मास्टर होना और बात इतने पर ही खत्म नहीं होती।

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