पांच रुपए वाला अंडा ढूंढते फिर रहे बिहार के सरकारी स्‍कूलों के शिक्षक, फेल होने पर रहता है डंडे का डर

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बिहार के सरकारी स्‍कूलों के शिक्षक परेशान हैं। वजह यह है कि उन्‍हें मीड डे मिल में बच्‍चों को अंडा खिलाना है। सरकार एक बच्‍चे को अंडा खिलाने के लिए पांच रुपए दे रही है, लेकिन बाजार में इस रेट पर अंडा मिल ही नहीं रहा है। ठंड का मौसम शुरू होते ही अंडे की कीमत और बढ़ गई है। अभी अंडा सात से आठ रुपए तक पीस बिकने लगा है।

अंडे वाले दिन बढ़ जाती बच्‍चों की भीड़

सरकारी स्‍कूलों के बच्चों को मीड डे मिल योजना के तहत हफ्ते में एक दिन अंडा देना है। बच्चे अंडा मांग रहे हैं।  हफ्ते के अन्‍य दिनों में स्‍कूल में कुछ कम बच्‍चे भी पहुंचते हैं, लेकिन अंडे वाले दिन स्कूल में बच्चों की भीड़ भी बढ़ जाती है। ऐसे में शिक्षकों के सामने चुनौती खड़ी हो जाती है।

अंडा नहीं दिया तो हंगामा होना तय

शिक्षकों के साथ अंडा बड़ी परेशानी बन रहा है। वे बच्‍चों को अंडा देने से मना नहीं कर सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो कई बार इसको लेकर अप्रिय स्थिति भी बन जाती है। लोग कहासुनी और मारपीट तक पर उतारू हो जाते हैं। बिहार के कई शिक्षक संगठन इन्‍हीं समस्‍याओं को देखते हुए उन्‍हें एमडीएम की जिम्‍मेदारी से मुक्‍त करने तक की मांग कर चुके हैं।

मैदान का ठिकाना नहीं, कहां खेलें बच्चे

पटना के मध्य विद्यालय पुनाईचक में वर्तमान में 350 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। स्कूल में आठ कमरे हैं और बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में नौ शिक्षकों की तैनाती है। स्कूल में सबसे बड़ी समस्या है कि खेल का मैदान नहीं है। सरकार की ओर से बैग लेस कार्यक्रम लागू कर दिया गया है।

शनिवार को किसी बच्चे को स्कूल में बैग लेकर नहीं आना है। उस दिन केवल खेलकूद का आयोजन होना है। इस माह के लिए विषय है हम खिलाड़ी है। यानी नवंबर में सरकार को खेलकूद पर विशेष जोर है। जिन स्कूल में खेल का मैदान नहीं है, वहां पर बच्चों को शनिवार को नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो रहा है।

योगाभ्यास से चलाया जा रहा काम

स्कूल के सहायक शिक्षक ब्रज भूषण पांडेय का कहना है कि स्कूल में खेल का मैदान नहीं होने की स्थिति में शनिवार को बच्चों को क्लासरूम में योगाभ्यास कराया जा रहा है। लेकिन उसकी भी सीमा है। एक-दो घंटी योगाभ्यास कराया जाता है। उसके बाद इंडाेर गेम की व्यवस्था कराई जा रही है। इसके अलावा विभिन्न विषयों पर चित्रांकन प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।

स्कूल को नहीं मिल रहा बेंच

स्कूल में बेंच नहीं होना एक बड़ी समस्या है। सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन दिया जा रहा है परंतु स्कूल को अब तक बेंच नहीं मिला। बेंच के अभाव में बच्चों को ठंड में नीचे जमीन पर बैठना पड़ रहा है। शिक्षकों को कहना है कि स्कूल अपनी ओर से कुछ बेंच की व्यवस्था किया है, परंतु जरूरत की तुलना में बहुत कम है। इस ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।

आकर्षक भवन एवं सुन्दर व्यवस्था

स्कूल का भवन काफी आकर्षक है। इसके अलावा कमरे भी ठीक हैं। प्राचार्य कक्ष किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है। प्राचार्य कक्ष में टेबुल-कुर्सी, सोफा, पंखा सबकुछ मौजूद है। पढ़ाई की बेहतर व्यवस्था के कारण स्कूल में बच्चों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।

 

 

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