48 घंटे में भी नहीं पहुंचा किसानों के बैंक खाते में रुपये, खगडि़या के पैक्‍सों ने धान खरीदकर द‍िया धोखा

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खगड़िया में मक्का और गेहूं के बाद सबसे अधिक धान की खेती होती है। आंकड़े में बात करें, तो यहां रबी मक्का की 15 हजार हेक्टेयर और खरीफ की 60 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। कुल 75 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती की जाती है। इसके बाद गेहूं की 35 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। तीसरे स्थान पर धान है। जिले में इस बार 28 हजार आठ सौ हेक्टेयर में धान की खेती की गई। जिला कृषि पदाधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि एक लाख 15 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ है। विपरीत मौसम के बावजूद किसानों ने अपने पीसने से खेतों को सींचा और धान का बंपर उत्पादन हुआ। पर धान खरीदारी की गति धीमी है। भुगतान को लेकर भी समस्या है। रबी की जुताई-बुआई को देखते हुए बड़े पैमाने पर किसान बिचौलिये और व्यापारियों के हाथों धान बेच चुके हैं।

सरकारी स्तर पर जिले में 15 नवंबर से धान की खरीद आरंभ हुई है। 21 नवंबर तक मात्र डेढ़ सौ किसानों से 757.5 एमटी धान की खरीद की जा सकी है। धान खरीद जारी है। पर किसानों को अब तक धान बेचे जाने का भुगतान नहीं हो पा रहा है। सरकारी स्तर पर धान की खरीद के बाद 48 घंटे के अंदर किसानों के खाते पर राशि भुगतान किया जाना है। पर जिले में समाचार लिखे जाने तक एक भी किसान को भुगतान नहीं किया जा सका था। 38 किसान का अभी एडभाइस ही भेजा जा रहा है। विभागीय अधिकारी के अनुसार एसएफसी के स्तर से भुगतान में विलंब हो रहा है। इस बार खरीद प्रक्रिया में एसएफसी को भी शामिल किया गया है। पैक्स, बीसीओ व डीसीओ स्तर पर सत्यापन के बाद एडभाइस एसएफसी को दिया जाता है। जहां से भुगतान होता है।

धान खरीद जारी है। डेढ़ सौ किसानों से अब तक धान की खरीद की गई है। भुगतान को लेकर प्रक्रिया की जा रही है। भुगतान प्रक्रिया में नई प्रक्रिया के तहत एसएफसी को शामिल किया गया है। जिसके स्तर से भुगतान में विलंब हो रहा है। – दीपक कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, खगड़िया।

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