सम्राट अशोक से लेकर राजेंद्र प्रसाद तक, महावीर से लेकर बुद्ध तक, आर्यभट्ट से लेकर आनंद कुमार तक, विक्रमशिला से लेकर नालंदा विश्वविद्यालय तक देश को ज्ञान, नीति, धर्म, राजनीति के क्षेत्र में बिहार ने मार्गदर्शन करने का कार्य किया। बिहार का अतीत इतना गौरवशाली है कि इसे चंद शब्दों में लिखना असंभव है लेकिन इतने गौरवशाली अतीत होने के बाद भी बिहार का वर्तमान आज हाशिये पर है।

बिहार पूरे देश मे आज नालंदा और महावीर के लिए नहीं बल्कि एक बीमारू राज के रूप में जाना जा रहा है ऐसे में बिहार के युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वो अपने राज्य के लिए कुछ ऐसा करें जिससे फिर से हमारा गौरवशाली इतिहास वापस लौटे और बिहार देश को फिर से मार्गदर्शन प्रदान कर सकें, शायद इसी सपने को साकार करने के लिए बिहार के एक छोटे से गाँव के 24 वर्ष के लाल नितीश कुमार सिंह ने लाखों की नौकरी ठुकरा कर राजनीति में कदम रखा है।

प्रारम्भिक पढ़ाई बिहार से पूरी करने के बाद समस्तीपुर के सरायरंजन गाँव के निवासी नीतीश ने दिल्ली के गलगोटिया यूनिवर्सिटी से 2018 में बी.टेक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले नीतीश जब दिल्ली में बिहारियों के साथ हो रहे भेदभाव को देखा तो उन्होंने अपने सपने को कुर्बान कर राज्य की सेवा करने का निर्णय कर लिया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी से बी.टेक पूरी करने के बाद नीतीश को मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा लाखों के सालाना पैकेज पर नौकरी का ऑफर मिला लेकिन नीतीश के बिहार को एक नयी पहचान बनाने की जिद्द ने उन्हें नौकरी ठुकराने को विवश कर दिया।

नीतीश देश की सबसे बड़ी राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा भाजयुमो के बिहार प्रदेश कार्यसमिति के सबसे युवा सदस्य हैं। नीतीश बिहार के युवाओं को बिहार के गौरवशाली इतिहास से परिचय करवाते हैं एवं उन्हें राज्य के प्रति निष्ठा भाव से सेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं। नीतीश के इस नेक कार्य के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य कई केंद्रीय मंत्रियो ने सराहा है।

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