बिहार में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। चाहे वो भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर हों, गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह हों या फिर 12 साल की उम्र में IIT पास करने वाला सत्यम।

ये सभी विलक्षण प्रतिभा के धनी रहे हैं। ऐसा ही एक युवा तथागत अवतार तुलसी है जिसने महज 10 साल की उम्र में ग्रेजुएशन करके इतिहास बना दिया था।
तथागत की ख्वाहिश बस यहीं नहीं थी। उसकी मंजिलें और भी थीं। उसने 12 साल की उम्र में एमएससी कर गिनीज बुक्स ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया।

यही नहीं, तथागत ने 21वें साल में प्रवेश करते ही इंडियन स्कूल ऑफ साइंस, बेंगलुरू से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली। वहीं, 23 साल की उम्र में आईआईटी, मुंबई ने तथागत को बतौर एसोसिएट प्रोफेसर अपने से जोड़ लिया।

ऐसा नहीं है कि दुनिया में तथागत अवतार तुलसी विलक्षण प्रतिभा वाले अकेले युवा रहे हैं, ऐसे लोगों की एक लंबी सूची है। बिहार में ही सत्यम और उसका छोटा भाई शिवम भी विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। सत्यम ने तो 12 साल की उम्र में आईआईटी में सफलता पाकर अपनी विलक्षण प्रतिभा को साबित भी कर दिया है।

वहीं, दुनिया की बात करें तो विलक्षण प्रतिभाओं की यह सूची जीवन के तमाम क्षेत्रों में फैली हुई है। चाहे 12 भाषाओं पर बेजोड़ पकड़ रखने वाले असद उल्ला कय्यूम हों या महज 13 वर्ष की उम्र में ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले चीनी खिलाड़ी फु मिंझिया, या फिर 17 साल में डॉक्टर बनने वाले बालामुरली अंबाती।

तथागत तुलसी का जन्म बिहार के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में नौ सितंबर, 1987 को हुआ था। तुलसी की विलक्षणता का अहसास उनके माता-पिता को उनके छह साल के होने पर ही हो गया था और इसे उन्होंने नौ साल में दसवीं पास करके और 12 साल में पटना यूनिवर्सिटी से 70.5 प्रतिशत अंकों के साथ एमएससी की परीक्षा पास करके सिद्ध भी किया।

तथागत की माने तो, ‘एक छात्र के लिए विश्लेषण, कल्पना और स्मरण की क्षमता उसकी मूल पूंजी है और जिसने भी अपने जीवन में इसे सही तरीके से अपनाया, सफलता उसके कदम चूमती रही।’ अकसर कहा जाता है कि बुद्धि जन्मजात होती है, ज्ञान अर्जित। लेकिन क्वांटम सर्च ऐल्गरिज्म पर अपना सिद्धांत प्रस्तुत करने वाले तथागत अवतार तुलसी में बुद्धि और ज्ञान का अद्भुत संगम है।

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