आपको बता दें, कि हिंदू धर्म में वैसे तो हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होते हैं, मगर शुक्रवार का दिन विशेष रूप से देवी मां संतोषी की पूजा अर्चना आराधना के लिए बहुत ही शुभ और विशेष माना जाता हैं। वही देवी मां संतोषी का व्रत करने से मनुष्य को चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं और उसकी सभी इच्छाएं भी जल्द से जल्द पूर्ण हो जाती हैं।

वही देवी मां संतोषी के पिता भगवान श्री गणेश और माता रिद्धि सिद्धि हैं वही धन धान्य और रत्नों से भरा परिवार होने की वजह से इन्हें देवी संतोषी के नाम दिया गया हैं। मगर व्रत इनका व्रत करने के पहले कुछ महत्वपूर्ण और विशेष विधान होते हैं, जिसका पालन किए बिना देवी मां संतोषी का व्रत पूरा नहीं होता हैं।तो आज हम आपको उन्हें खास नियमों और व्रत में पूजन के ​विशेष विधानों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।

आपको बता दें, कि शुक्रवार के दिन सूर्योदय से पहने मनुष्य को उठना चाहिए और घर में अच्छी तरह से साफ सफाई करने के बाद स्नान आदि करने के पश्चात ही पूजन प्रारंभ करना शुभ माना जाता हैं। वही घर के किसी भी शुभ और पवित्र स्थान पर देवी मां संतोषी की मूर्ति को स्थापित करना चाहिए।

वही पूजा स्थल के पास किसी बड़े बर्तन में जल भरकर रखें और उस बर्तन में गुड़ व चने अवश्य ही रखें। वही इस दिन देवी मां संतोषी के सामने घी का दीपक जलाकर भोग अवश्य ही लगाएं मां संतोषी की कथा भी सुनें। वही पूजन के सम्पन्न होने के बाद गुड़ और चने का प्रसाद सभी लोगो में बाट दें। इसके बाद रखा हुआ जल अपने पूरे घर के कोने में छिड़क दें। इससे आपको घर पवित्र हो जायेगा।

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