फाइल फोटो

बात अप्रैल के फर्स्ट वीक की है जब मैं मधुबनी रेलवे स्टेशन पर जानकी एक्सप्रेस से दिन के 12:30 में उतरा। तो सामने की दीवाल पर पद्मश्री सीता देवी की पेंटिंग को देखा जो बदरंग और दीवाल पर से टूट रहा था। मैं ने DRM समस्तीपुर, रेल मंत्रालय और रेल मंत्री को ट्वीट किया कि मधुबनी स्टेशन पर सीता देवी की पेंटिंग टूट रही है उसे ठीक करवाया जाय और हो सके तो पूरे स्टेशन को मिथिला पेंटिंग से सजाया जाय। कुछ दिन इंतजार के बाद भी जब कोई जबाब नही मिला तो फिर से ट्वीट किया , पर कोई जबाब नही अंत मे गूगल पर DRM समस्तीपुर का नंबर खोजा बात हुई और DRM ने मुझे मिलने का समय दिया। किसी कारणवश मैं उस दिन नही जा पाया जिसकी सूचना दे दी गई उनको और अगले दिन मिलना तय हुआ पर अगला दिन विश्वकर्मा पूजा के कारण पूजा के बाद अगला दिन मिलना तय हुआ। अगले दिन स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से मैं शाम के 5 बजे DRM ऑफिस पहुंचा। वहाँ पहले से ही कई अधिकारी मौजूद थे। उनलोगों ने मेरी बात को बड़े गौर से सुना साथ ही अपनी शंका भी बताई की इतना बड़ा काम श्रमदान से कैसे होगा। मैं ने उनको विश्वास दिलाया आप भरोषा करें हो जाएगा। तब DRM ने मुझे दो मिनट रुकने को कहा और एक अधिकारी को बुलाया जिसका नाम गणनाथ झा था। DRM ने उनको क्लियर कहा कि ये राकेश जी हैं आप भी चुकी उसी क्षेत्र के हैं अतः आप इनकी हेल्प करेंगे इस प्रोजेक्ट में और इन्हें जो सुविधा चाहिए स्टेशन पर आप उलब्ध करवाएंगे। उसके बाद मैं 7:30 में एक पैसेंजर ट्रेन से वापस आज्ञा।

दो दिन बाद मुझे गणनाथ झा का फोन आया कि मैं कल आऊंगा आप एक बार स्टेशन पर मिले। नियत समय पर हमलोग मिले। उसके बाद मुझे कहा गया कि एक दो दिन में DRM सर भी आएंगे तो आप अपना पूरा थीम डिसाईड कर लीजिए जो कहाँ क्या बनेगा। अब तक जो भी बाते आगे बढ़ रही थी रेलवे के साथ उसे पल पल फेसबूक पर डाल रहा था। मैं भी चाहता था कि एक बार DRM आये और इस प्रोजेक्ट को अपने मुहँ से प्रेस के सामने बोल दे ताकि कल हो कर अगर किसी कारण से रेलवे काम नही करता है तो लोग ये ना बोले कि राकेश झूट बोल रहा है। जिस दिन DRM सर को आना था उस दिन मैं दरभंगा में था मुझे कहा गया कि आप दिल्ली मोर ( दरभंगा बस स्टैंड ) पर आ जाइयेगा , हमलोग वहां से साथ मधुबनी चलेंगे। अगले दिन हम सब तय समय पर मधुबनी रेलवे स्टेशन पहुंचे मैं ने जो जो दीवाल की मरम्मत आदि की बात कही खड़े खड़े DRM सर ने ऑर्डर दिया साथ ही 10 दिन में पूरे स्टेशन परिसर को व्हाईट पुट्टी करवाने का आदेश दिया। मैं भी उस दिन लगभग 60 कलाकारों को ले कर आया था जिन्होंने DRM सर के सामने वादा किया कि हमलोग श्रमदान करेंगे। उसके बाद DRM सर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और मैं एक दबाब से मुक्त हुवा की अब ये रेलवे इस काम से पीछे नही हट सकता। मैं वापस दरभंगा बस से आया तो एक पोस्ट किया कि असफलता अनाथ होती है और सफलता के इतने बाप पैदा हो जाते हैं कि उसे खुद को नाजायज घोषित करना पड़ता है। मुझे डर है कि इस कार्य के बाद क्रेडिट लेने की मार होगी।

एक दो दिन बाद शारदीय नवरात्र था मैं अपने गांव चला आया , इधर रेलवे स्टेशन की दीवाल को पेंटिंग लायक बनाने का काम भी आरंभ हो गया। जब मैं गाँव मे ठै तो मुझे गणनाथ जी का कॉल 10 दिन तक नही आया। इसी बीच मुझे पता चला कि रेलवे ने एक  इस्तिहार लगाया है कि जो भी कलाकार पेंटिंग करना चाहते है स्टेशन मास्टर जे के पास अपना आवेदन दें। मुझे थोड़ा आश्चर्य लगा कि जब आर्टिस्ट 60-70 तैयार हैं तो फिर ये इस्तिहार क्यों पर मैं ने इस मैटर पर कुछ ज्यादा ध्यान नही दिया। जब मुझे 10 दिन तक कोई कॉल नही आया तो मैं समझ गया कि रेलवे उस दिन 60 कलाकरों की सहमति के बाद रेलवे कॉन्फिडेंस ने है कि अब राकेश की इस प्रोजेक्ट में कोई जरूरत नही और इसी लिए 10 दिन से मुझे कोई कॉल भी नही आया है जबकि मैं ने सम्पर्क करने का प्रयास किया था पर कॉल रिसीव नही किया गया। मैं भी ये सोच के खुश चलो स्टेशन रंगवाने का उद्देश्य जो था वो तो हो ही जायेगा। पर ठीक 11 वें दिन रात के 8 बजे मुझे कॉल आया ” मैं गणनाथ झा बोल रहा हूँ , परसो यानी 2 OCT को DRM सर इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे इससे पहले कलाकार को 1 OCT को सब बता दिया जाएगा कि किसे कौन से जगह पर क्या बनाना है। मैं ने गणनाथ को कहा की आपने 10 दिन से कोई सम्पर्क नही किया तो मुझे लगा कि मेरा अब कोई रोल नही तो मैं ने उस दिन के बाद कलाकारों से कोई सम्पर्क नही किया है , मुझे अब इस प्रोजेक्ट से कोई मतलब नही। इस पर बड़े निरीह भाव से उन्होंने विनती की 11 बजे सबको बोलिये राकेश जी आ जायेगा आप भी आ जाइये, समझिये ये अब हमलोगों के कला के इज्जत का सवाल है। मेरा भी मन बदल गया और मैं ने कहा आप निश्चिन्त रहें सब कुछ सही समय पर होगा मैं आ जाऊंगा।

एक अक्तूबर को मैं लगभग 90 आर्टिस्ट के साथ 11 बजे वहाँ पहुंचा । गणनाथ झा पहले से थे रेलवे जे जो स्टेशन पर इस्तिहार लगाये ठै उसको देख कर भी लगभग 15 से 20 कलाकार आये थे । कुल मिला कर सभी कलाकारों को पूरे स्टेशन परिसर में थीम के साथ एरिया भी बांट दिया गया और हमलोग घर आ गए । चुँकि मैं मधुबनी का रहने वाला नही था और मैं लोगों से एक फेसबूक आई डी craftvala नाम से सम्पर्क किया था तो सभी मुझे craftvala के नाम से ही जानते थे , अतः ये मेरी उन कलाकारों से पहली मुलाकात थी । बात चीत करते करते और स्टेशन पर मचान तैयार करवाते रात में 11 बज गये । अगले दिन 2 OCT गाँधी जयंती सुबह 10 बजे DRM सर के उपस्थिती में इस कार्य का श्री गणेश हुवा । मंच से DRM सर ने मेरी और कलाकारों की प्रसंशा भी की साथ ही 100 रुपये प्रति दिन के हिसाब से भोजन पानी के लिए देने की बात दोहराई । सभी कलाकार ने खुशी खुशी श्रमदान करने को तैयार हुवे । ऐसी दौरान जब मैंने गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड की चर्चा की तो मुझे कहा गया व्व हम लोग देख लेंगे आप यहाँ सारा देखिए और हो सके तो मीडिया में इस बात को रखिये की यहाँ एक अनोखा काम हो रहा । चुँकि मैं मधुबनी मीडिया के स्तर से वाकिफ था इसलिए उसी रात पटना निकल गया और अगले दिन पटना में सभी मीडिया हाउस जा कर भेंट कर और टेलीफोन से भी सबको सम्पर्क कर इस कार्य को अखबार और टेलीविजन पर जगह देने की प्रार्थना की सबने सहयोग का वचन दिया । इसी बीच मैं ने एक वीडियोग्राफी करने वाले को शुरू से अंत तक पूरे कार्यक्रम का वीडियो तैयार करने को कहा था , उसका फोन आया कि गणनाथ झा उसे वीडियो शूट करने से रोक रहें है और परमिशन लेटर मांग रज हैं मैन उसे कहा कि बोलो राकेश ने कहा है तो वो बोला कि कहता है उसके कहने से क्या होगा जब तक पेपर नही दिखाओगे तुम वीडियो नही बना सकते । मैं ने उसे 2 मिनट वही रहने को कहा और DRM सर को फोन किया उन्होंने तुरत गणनाथ झा को फोन कर कहा की वीडियो बनने दो । मुझे एक बार लगा कि इसने वीडियो बनाने से क्यों रोका पर उस समय नही जानता था कि ये जानबूझ कर ऐसा कर रहा है। खैर मैं सभी मीडिया बंधु से मिल काम खत्म कर 7 बजे बस में बैठा तो मधुबनी के ZEE मीडिया के रिपोर्ट का फोन आया कि मुझे आप से मिलना है । अगले दिन सुबह में 11 बजे न्यूज कवरेज ऑन एयर हुवा की विश्व रिकॉर्ड बन रहा है कि न्यूज चैनल वालों की भीड़ लगनी शुरू हो गयी । हर मीडिया हाउस से फोन आने लगे सभी मेरा बाईट और स्टेस्टमेंट ले रहे थे । TV अखबार हर जगह इस काम के साथ साथ क्राफ्टवाला कि चर्चा थी और सभी रेलवे को सभी धन्यवाद दे रहे थे । मैं उस पूरे 12 दिन केवल रात का खाना खाता था दिन भर लिट्टी, समोसा पर ही  निकलता था । जैसे तैसे कर काम आगे बढ़ रहा था लोग वाह वाह कर रहे थे । मैं देख रहा था कि एक इतिहास बन रहा है । DRM सर भी खुश हो जब आते थे खुलेआम कहते थे कि राकेश के दिमाग की उपज है नही तो ये काम हमलोग कब से सोच रहे थे पर सब कहता था इतना रुपये वर्ग फुट तो इतना रुपये वर्ग फुट । एक दिन AD हैंडीक्राफ्ट मधुबनी स्टेशन पर आए तो बोले कि इन कलाकारों का आर्टिजन कार्ड नही बना है अगर ये लोग आधार का एक कॉपी दे तो यहीं आर्टिजन कार्ड बन जायेगा।

अगले दिन मैं ने सोनू निशांत को कहा कि सबको बोलिये की अपना आधार कार्ड जमा करे । सब कलाकार को बोला गया मैक्सिमम कलाकारों को मैं ने ही बुलाया था सबने खुशी खुशी जमा करना शुरू किया तभी गणनाथ झा आया बिना मेरे से कोई बात किये की आप क्यों आधार कार्ड ले रहे हैं स्टेशन पर अनाउंस करवा दिया कि किसी के मांगने पर अपना आधार कार्ड ना दे । इसका प्रयोग आतंकवादी गतिविधियों में हो सकता है । मैं गुम की ये क्या बोल रहा है जा कर बोला तो बोला नही आप ये नही ले सकते मैं ने कहा ये सभी कलाकार के भलाई की चीज है इनका कार्ड बनने के साथ साथ डाटा एक जगह हो जाएगा ताकि भविष्य में ये काम आएगा पर गणनाथ झा नही माना । मैं चुपचाप वहां से वापस आ गया । कुछ ही घण्टे बाद पता चला कि रेलवे खुद आधार कार्ड कलेक्ट कर रहा है । खैर बात आई गयी हो गयी । पर इस दौरान मैं ने अनुभव किया कि ये तो बुरी नियत से मेरे हर काम को विरोध कर रहा है । मैं स्टेशन से बाहर था कि मुझे फोन एक लड़की का फोन आया कि सर आपने बुलाया था इसलिए आये भी गणनाथ झा ने बहुत ही खराब लहजे में मेरे से बात की है और पिछले 5 दिन से जिस जगह पर मैं आधा से अधिक पेंटिंग बना चुकी हूं उस जगह से हटा कर वहां किसी अशोक पासवान को कह रहा बनाने को और मुझे धूप में बाउंड्री वाल पर बनाने कहा जा रहा । मुझे ये बात बहुत ही खराब लगा कि जब सभी को पता था कि ये श्रमदान से कार्य हो रहा है तो तब कोई नही आना चाहता है और अब जो पहले से कम कर रहा है उसे डिस्टर्ब कर नए लोगो को मेरे रोकने के वाबजूद की इससे अव्यवस्था उतपन्न होगी आखिर गणनाथ झा क्यों दिन रात नए कलाकार को इसमे जोर रहे हैं । बाद में पता चला ये सारा खेल ग्राम विकास परिषद नाम के एक ngo का है जिसे गणनाथ सपोर्ट कर रहा है ताकि क्राफ्टवाला से ज्यादा आर्टिस्ट इस ngo का हो और राकेश झा क्राफ्टवाला को इस कार्य का क्रेडिट ना जाय । जब मैं स्टेशन पहुंचा तो जिस ग्रुप के कलाकार ने मुझे फोन कर बुलाया था वो मेरे सामने रोने लगी कि जब हम लोगो ने इस जगह से कहीं अन्य काम करने से मना किया तो बुरी तरह से बात किये हैं गणनाथ झा । मैं बहुत दिन से बर्दास्त कर रहा था एक बार मुझे आतंकवादी कहना अब लड़कियों के साथ मिस विहेब मैं सीधे गणनाथ झा के पास गया और बोला आप क्या चाहते है काम करवाना है कि नही । इस पर मेरी उसके साथ बकझक हो गई मैं ने सभी कलाकारों को काम रोक देने को कहा । सभी ने काम बन्द कर दिया अब सभी अधिकारी की अकड़ ढीली हो गयी । कितना भी गणनाथ झा ने कहा कोई काम करने को राजी नही । सबने मन भर गणनाथ झा को गाली दिया । तभी DRM सर का फोन आया मै ने साफ साफ कह दिया जब सम्मान नही तो श्रमदान का क्या महत्व नही होगा काम । अंततः बहुत समझाने पर मैं इस शर्त पर काम करने को राजी हुवा की कलाकार के मैटर से गणनाथ झा बिल्कुल दूर रहेंगे । DRM सर राजी हुवे और काम शुरू हुआ । लेकिन उसके बाद कलाकारों की भर्ती अभियान गणनाथ झा द्वारा काफी तेज हो गयी । 110 कलाकार की संख्या देखते देखते 200 के आसपास हो गयी । इस बीच एक दिन गणनाथ झा ने अशोक पासवान को भीमराव अंबेडकर और गांधी जी की फोटो मुख्य द्वार पर बनाने को कहा । भीमराव अंबेडकर के नाम पर सभी पासवान कलाकार खुश हो गए और पेंटिंग बनवा दिया । वो किसी भी कोने से भीमराव अंबेडकर लग ही नही रहा था । मैं सर पकड़ लिया कि ये क्या करवा दिया गणनाथ झा ने पर मुझे पता नही था ये कलाकारों के साथ दलित कार्ड खेल गुटबंदी कर रहा था ।

उसी शाम DRM सर का स्टेशन पर आना हुवा । उन्होंने जब देखा तो मुझे डांटा की ये क्या बनवा रहे हो राकेश तो मैं ने कहा मैं ने नही गणनाथ जी ने बनवाया है । उन्होंने आदेश दिया इसी मिटा दो ये नही बनेगा । उसके बाद DRM सर ट्रेन से इंजन में बैठ समस्तीपुर चले गए । पर स्टेशन पर मिटाते वक़्त कुछ दलित वर्ग के नेताओ ने आ कर हल्ला करना शुरू कर दिया पर फिर भी उसे मिटा दिया गया । पेंटिंग कार्य अब अंतिम चरण में था तो जैसे पहले ही कमिटमेंट था की पेंटिंग के बगल में कलाकार का नाम,पता, मोबाईल नम्बर के साथ संस्था का नाम होगा सबने क्राफ्टवाला का नाम अपने नाम के साथ लिखा । इस तरह सभी कलाकार का काम खत्म हुआ । काम खत्म होने के अगले दिन एक कार्यक्रम किया गया मुझे किसी रेलवे प्रतिनिधि ने बुलाया नही था परंतु मैं फिर भी चला गया । जब सुबह 7 बजे मैं स्टेशन पहुंचा तो कलाकारों के अवदान में सबसे पहले ग्राम विकास परिषद और क्राफ्वाला के बदले राकेश कुमार झा नाम लिखा था । मैं ने इसका विरोध किया कि ग्राम विकास परिषद का नाम क्यों जबकि क्राफ्टवाला का नाम नही है तो कहा गया कि राकेश कुमार झा है ना तभी किसी कलाकार ने कहा इसका क्या सबूत है कि ये यही राकेश कुमार झा है । राकेश कुमार झा ग्राम विकास परिषद के संचालक के बेटे का नाम है।  लोग तो आगे ग्राम विकास परिषद को देख यही समझेगा की सारा काम ग्राम विकास परिषद ने किया । कलाकारों के भारी विरोध के बाद ग्रान विकास परिषद जे नाम को व्हाइटनर से मिटा दिया गया । जब कार्यक्रम शुरू होने में कुछ मिनट बांकी थे कि लगभग 10 बड़ी बड़ी सार्वजनिक कम्पनियों का स्पॉन्सर बोर्ड लगाया गया मैं ने उसका भी विरोध किया पर उसे नही हटाया गया । खैर मैं कार्यक्रम को भंग नही करना चाहता था मैं केवल इस संदेह में कई कहीं कल हो के कोई घोटाला निकले तो कोई सबूत हो मेरे पास मैं वीडियोग्राफी हो ही रहा था मैं ने चुप रहने में ही भलाई समझी । कार्यक्रम के दौरान जो 100 रुपये प्रति दिन भोजन के देने की बात हुई थी उससे कम रुपए कलाकारों को दिए गए तो एक को खाली लिफाफा थमा दिया गया । जिस पर कुछ कलाकारों ने सवाल उठाया तो जबाब दिया कि कलाकारों की संख्या बढ़ जाने के कारण कटौती की गई । तो मैं ने कहा कि इतने बड़े बड़े स्पॉन्सर के वाबजूद पैसे की तंगी क्यों हुई तो कोई संतोषजनक जबाब नही मिला । उसके बाद कुछ कलाकारों ने विरोध में स्वर उठाया भी जिसकी प्रॉपर वीडियोग्राफी भी हुई । मुझे बार बार घोटाले की आशंका हो रही थी लेकिन अब मेरे हाथ मे कुछ नही था । रेलवे ने गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड से भी पल्ला ये कह कर झाड़ लिया कि हमलोग इसके प्रोसेस में लगे हैं । सभी लोग खुद को रेलवे द्वारा ठगे महसूस किए जा रहे थे । पर अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत । मेरी तो और भी बुरी हालत थी 10 दिन भूखे प्यासे काम करवाने जे बदले रेलवे ने एक एप्रिसिएशन लेटर भी मुझे नही दिया । मैं खुद को इतना अपमानित महसूस कर रहा था जिसका जबाब नही । 

कुछ महीने बाद रेल मंत्रालय की तरफ से इंडिया के दूसरे सबसे गंदे स्टेशन को दूसरा सबसे स्वच्छ और सुंदर स्टेशन का खिताब किसी अन्य स्टेशन के साथ संयुक्त रूप से मिला । सबको बहुत खुशी हुई कि एक हफ्ते के बाद मेरे पास एक सर्टिफिकेट आया जिसे देख साफ साफ़ पता चलता था कि रेलवे ने कुछ चापलूस कलाकारों को मनमाने तरीके से ये सर्टिफिकेट और पुरस्कार का पैसा मनमाने तरीके से बांटा है ताकि इस पुरस्कार राशि को मनमाने तरीके से बांटा जा सके । इस सर्टिफिकेट ने कलाकारों के असंतोष को भड़का दिया । अब मुद्दा आत्म सम्मान की थी कई सारे कलाकार ने मुझे कम्प्लेन किया । मैं ने भी ट्विटर के माध्यम से अपनी नाराजगी जताई । साथ ही कलाकारों को सलाह दिया कि वो एक आवेदन स्टेशन मास्टर मधुबनी को दे । जब कलाकारों के द्वारा स्टेशन मास्टर को आवेदन देने के लिए सम्पर्क किया गया तो उसने लेने से इनकार किया उससे कलाकार भड़क गए और उन्होंने पहली बार जयनगर से नई दिल्ली स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट ट्रेन को मधुबनी स्टेशन पर रोका । ट्रेन रोकने से जो दबाब बना उसका परिणाम ये आया कि मधुबनी रेलवे स्टेशन मास्टर ने कलाकारों के मांग का आवेदन ले लिया । कलाकारों ने सात दिन के अंदर इन सभी मुद्दों पर एक जांच कमिटी की मांग की अन्यथा सात दिन बाद पुनः ट्रेन रोकने की बात कही साथ ही DRM समस्तीपुर, GM हाजीपुर, रेल मंत्री, रेलमंत्रालय सबको एक कॉपी मेल कर दिया। पर सात दिन तक कोई जबाब नही मिला अब कलाकार एक बार पुनः ट्रेन रोकने को बाध्य थे । फिर से 23/7/18 को स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट ट्रेन को मधुबनी स्टेशन पर रोका गया एक भी रेलवे अधिकारी ने कलाकारों से बात करना उचित नही समझा । घन्टो ट्रेन परिचालन बाधित रहने के बावजूद किसी ने कलाकारों की मांग के संबंध में बात करना उचित नही समझा उल्टे रेल पुलिस ने यात्रियों को भड़काना शुरू किया कि वो लोग कलाकारों के साथ हाथापाई कर रेल ट्रैक ख़ली करवा लें । तब DM मधुबनी ने SDO मधुबनी और DSP मधुबनी को रेल ट्रैक खाली करवाने को भेजा । जब पुलिस आई तो मैंने कहा कि स्टेशन परिसर में आप क्यों आ गए एक्शन लेने तो मुझे कहा गया कि राकेश जी DM साहब ने भेजा है आपको बोले है कि मेरे विश्वास पर कहना राकेश को कि कलाकारों के साथ अन्याय नही होगा वो रेल ट्रैक खाली करवा दे। कलाकारों के नजर में DM मधुबनी की एक अलग इज्जत थी मैं ने DM साहब के नाम पर कलाकारों को रेल ट्रैक खाली करने को कहा और सभी उठ गए तथा अगले दिन कलाकारों की एक प्रतिनिधि टीम को DM सर से मिलना और अपनी मांग रखना तय हुआ । अगले दिन हमलोगों ने सभी मांगो के साथ एक आवेदन DM साहब को दे दिया । जिसमें हमलोगों ने कलाकारों को श्रमदान के बदले दिए गए सर्टिफिकेट पर कहीं भी श्रमदान नही लिखा होना, बड़ी बड़ी स्पॉन्सर कम्पनियों के नाम का फोटो ग्राफ, पुरस्कार के बंदरबांट के प्रमाण के रूप में कलाकारों को रेल मंत्रालय द्वारा दिया गया सर्टिफिकेट आदि दिखने दिए । जिसे देखने जे बाद DM सर ने भी विचार व्यक्त किया कि कलाकारों के साथ गलत हुवा हैं । पर चुँकि मामला रेलवे का था इस लिए कुछ भी करने से खुद को असमर्थ बताया । उसके बाद  कलाकारों ने अब थकहार कर घर बैठना ही उचित समझा । पर मैं अब इस लड़ाई को कागज पर लड़ना चाह रहा था । अतः मैं ने एक RTI रेलवे डिवीजन समस्तीपुर में फाइल किया । कि मधुबनी रेलवे स्टेशन पर हुवे मिथिला पेंटिंग के कार्य मे कुल कितने स्पॉन्सर थे उनसे कितने रुपये लिए गए । जबाब मिला एक भी स्पॉन्सर नही थे और कोई रुपया नही लिया गया । अब मेरे पास प्रमाण था कि मैं रेलवे को हाई कोर्ट में प्रमाण के साथ PIL डाल खड़ा कर सकता था । पर कौन इतनी लड़ाई करे ये सोच छोड़ दिया । इसके 10 महीने बाद मेरे घर पर एक दिन अचानक कुछ पुलिस वाले आये और मेरे बारे में पूछा । मेरे पापा ने मुझे फोन पर बात की तो पता चला कि मेरे पर अरेस्ट वारंट निकला है समस्तीपुर रेल कोर्ट से केस नम्बर 373/18, धारा 145 146 और 176 A के तहत 4 नामजद राकेश कुमार झा, सोनू निशांत, रत्नेश झा , सुरेंद्र पासवान के साथ 60 अज्ञात पर । मैं डर गया और मैं ने रेलवे की इस जुल्म की बात फेसबुक पर डाली । देखते ही देखते ये खबर वाइरल हो गया ।

नोट: यह व्यक्तिगत लेख है. इस लेख से वेबसाइट संचालक व एडिटर को कोई लेना-देना नहीं है.


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