लोकआस्था का महापर्व छठ को सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। देश के हिन्दी पट्टी में मनाया जाने वाला यह पर्व खासकर बिहार वासियों के दिल के सबसे करीब है। बिहार वासियों के प्रेम ने छठ को ग्लोबल पर्व और ठेकुआ को ग्लोबल मिठाई बना दिया है। बिहारी मतलब कह सकते हैं कि जिसके यहाँ छठ होता हो और ठेकुआ उसे सबसे ज़्यादा पसंद हो।

छठ एक ऐसा पर्व है जिसे अपनी हैसियत के हिसाब से समाज का हर तबका मनाता है। पूर्णिया के सांसद संतोष कुशवाहा पिछले कई सालों से छठ करते आ रहे हैं। एक बिहारी सब पर भारी से बात करते हुए सांसद कहते हैं कि छठ जैसा पर्व हम बिहार और देशवासियों के लिए गौरव की बात है।

माँ के शारीरिक रूप से असमर्थ होने के कारण वो पिछले चार सालों से छठ व्रत करते हैं। उनका इस पर्व के प्रति काफ़ी श्रद्धा और लगाव है। उन्होंने कहा कि वो हर साल छठ में अपने क्षेत्र की जनता के सर्वांगीण विकास की प्रार्थना करते हैं। सांसद ये भी बताते हैं कि वो बचपन से ही माँ को छठ करते देखते आये हैं लेकिन जब से वो असमर्थ हो गईं तो उनके निर्देश पर अब वो छठ व्रत कर रहे हैं। घर में वर्षों से चली आ रही परंपरा न टूटे इसके लिए सांसद भी छठ व्रत करते हैं। कुछ ऐसे ही उदाहरण इस महापर्व को सबसे अलग करता है।

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