बिहार के हर घर में आज नहाय खाय के साथ महापर्व छठ का आगाज़ हो चुका है. हर घर में आज नहाय खाय की रीति पूरी की गई. नहाय खाय पूरी तरह से स्वच्छता और भात और कद्दू की सब्जी के इर्द गिर्द होता है. आज के दिन स्नान के बाद भात ( चावल) और कद्दू की सब्जी भोजन में ग्रहण किया जाता है.

माना जाता है कि कद्दू में 96 प्रतिशत पानी की मात्रा होती है. जिसको ग्रहण करने से शरीर निर्मल होता है. आज के दिन व्रत करने वाली महिलाएं अपने नाखून काटकर और सर से स्नान शुद्ध होती है.

पूरे बिहार में आज से चार दिनों तक चलने वाले महापर्व छठ का आगाज़ आज से हो चुका है. कल खरना है जिसे “लोहंडा-खरना” भी कहते हैं. इसके संध्या अर्घ में डूबते सूरज की पूजा होगी और अगली सुबह उगते सूरज की. यह मात्र एक पर्व है जिसमें डूबते सूरज की भी पूजा की जाती है. बिहार का सबसे बड़ी पूजा छठ पूजा ही है. 

मान्यता है कि पांडव जुए में जब राजपाट हार चुके थे तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था. जिससे पांडवों को राजपाट वापस मिल सका था. ऐसी भी मान्यता है कि महाभारत काल में छठ पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण ने की थी. सूर्य की कृपा से ही वो महान योद्धा बन पाए. छठ को लेकर आस्था कि अनेकों कहानियां है. ये कहानियां लोगों की छठ में आस्था बनाए रखती है. आप सभी एक बिहारी की टीम की तरफ से आस्था के महापर्व छठ की हार्दिक बधाई.

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