मां काली की प्रतिमा स्थापित की गयी। मंगलवार को विधि-विधान से पूजा होगी। यहां पर पाठा की बलि दी जायेगी। शहर के बुढ़िया काली मंदिर परबत्ती, बमकाली जोगसर, मशानी काली, ऊर्दू बाजार, मशानी काली बूढ़ानाथ, मशानी काली घंटाघर, कालीबाड़ी, दुर्गाबाड़ी, रिफ्यूजी कॉलोनी, तिलकामांझी, मिरजानहाट, जरलाही, नाथनगर, बरारी आदि जगहों पर मां काली प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद विधि-विधान से पूजा हुई। इस दौरान मंत्रोच्चार व धूप-दीप के सुगंध से माहौल भक्तिमय हो गया।

सैकड़ों लोगों ने दीप प्रज्वलित कर माता की आरती की। इसी दौरान लोगों ने गंगा की स्वच्छता का संकल्प लिया। छह नवंबर मंगलवार को मां काली की प्रतिमा 12 बजे रात तक स्थापित हो जायेगी। प्रतिमा का निर्माण अंतिम चरण में है। कई जगहों पर पंडाल बनकर तैयार हो गये हैं। अंगधात्री शक्तिपीठ के आचार्य पंडित अशोक ठाकुर ने बताया कि मंगलवार को अमावस्या का प्रवेश 10.16 बजे रात में हुआ। नवसंघ के अध्यक्ष असित दास ने बताया कि इस बार गोल्डेन जुबली वर्ष मनाया जा रहा है।

संकरी गलियों से प्रतिमा को निकालने के लिए चबूतरों को हटाया जाना जरूरी है। विसर्जन मार्ग पर गलियों की मरम्मत, सड़क का पैचवर्क न होने से पूजा समिति के पदाधिकारी परेशान हैं। पूजा के साथ 24 घंटे सप्तशती का पाठ शुरू हो गया। हड़बड़िया काली, मंदरोजा में पंडित मनोज कुमार मिश्रा व पांच पंडितों के द्वारा मां काली की पूजा कराई गयी। बम काली मंदिर में वैदिक ढंग से पूजा-अर्चना की गयी। कई जगहों पर तांत्रिक व वैदिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना होती है।

हड़बड़िया काली मंदिर के पुजारी पंडित मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि मां काली के गुस्सा को शांत करने के लिए उनके सामने केला व ईख रखा जाता है जिससे मां काली प्रसन्न होती हैं। यहां पांच पंडितों द्वारा स्तुति व हवन कराया जाता है। मां काली की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना कार्तिक चतुर्दशी की रात को होगी। परबत्ती पूजा समिति के अध्यक्ष कामेश्वर यादव ने बताया कि शोभायात्रा में रथ, घोड़े, के साथ युवक शस्त्र के साथ कलाबाजी दिखाते हुए चलेंगे।

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