विवेक कुमार सिं‍ह पिछले 12 साल से अपने गांव बरगजवा में पौधरोपण कर सभी लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे है। उनका यह गावं बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में है। जहां वह अब तक दो हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। विवेक कुमार छुट्टियों में मौज-मस्ती नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए करते हैं काम करते है। तो वहीं अपने इस काम के कारण वह कई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। कई उनकी राह पर चल रहे हैं।

रणविजय सिंह के इकलौते पुत्र विवेक ने बचपन से ही अपने पिता में पौधरोपण के प्रति संवेदनशीलता देखी। वे भी खुब पेड़-पौधे लगाते थे। स्कूली किताबों में पर्यावरण के महत्व पाठ से भी काफी प्रेरणा मिली। फिर तो जैसे संकल्प ही ले लिया कि कहीं भी रहूं, छुट्टियां पौधों के नाम ही गुजरेंगी।

विवेक कुमार वर्ष 2006 से जब मैट्रिक में थे तो पौधरोपण अभियान शुरू किया। स्नातक, एलएलबी और एमबीए तक की पढ़ाई तक के दौरान जब भी छुट्टियां मिलीं, घूमने-फिरने में समय जाया करने के बजाय पौधरोपण और उसकी हिफाजत में दिया। आम, कटहल, महोगनी और शीशम के पौधे लगाने को प्रमुखता दी। उनके प्रयास के चलते गांव में हरियाली है। लोग न केवल उनकी सराहना कर रहे, बल्कि कई ने पौधरोपण भी शुरू कर दिया है।

तो वहीं दो साल तक पुणे की एक कंपनी में नौकरी के बाद विवेक 2016 में घर चले आए। जहां अब पूरा समय वकालत और पर्यावरण को देते हैं। लोगों को अपने पैसे से पौधा उपलब्ध कराते हैं। समाजसेवा से भी जुड़े हैं। उनके लगाए पौधों के फल और उनसे निकली लकडिय़ों को गांव के गरीबों व जरूरतमंदों में बांटते हैं। उधर वाल्मीकिनगर के सांसद सतीशचंद्र दुबे कहते हैं, इससे सभी को सीख लेनी चाहिए। समय का सदुपयोग हो और उसका लाभ आम जनता को मिले, ऐसा काम करना चाहिए। यह सराहनीय है।

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