वे दूसरी से आगे पढ़ नहीं पाए। उन्हें न तो हिंदी आती है और न अंग्रेजी। कोलकाता में टैक्सी चलाते हैं। लेकिन किसी और जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई की गाड़ी दूसरी पर आकर न ठहर जाए, इस बात की चिंता करते हैं और हरसंभव जतन भी। ये शख्स हैं 70 साल के गाजी जलालुद्दीन, पेशे से टैक्सी चालक। पिछले 38 वर्षों से कोलकाता की सड़कों पर टैक्सी दौड़ा रहे हैं। लेकिन गाजी की पहचान महज इतनी नहीं है।

कौन बनेगा करोड़पति यानी केबीसी में गाजी ने 25 लाख रुपये जीते हैं। कार्यक्रम का प्रसारण दो नवंबर को होगा। गाजी का कहना है कि जीती हुई रकम से वे जरूरतमंद बच्चों के लिए नि:शुल्क कॉलेज खोलेंगे। गाजी फिलहाल टैक्सी चलाने के अलावा पश्चिम बंगाल के सुंदरवन इलाके में गरीब बच्चों के लिए दो नि:शुल्क स्कूल चलाते हैं और उन्होंने एक अनाथालय भी खोला है। किसी टैक्सी चालक के लिए यह काम इतना आसान कतई नहीं। लेकिन इसके लिए उन्होंने अपनी सारी संपत्ति लगा दी। साधारण से दिखने वाले इस असाधारण इंसान को केबीसी में आमंत्रित करने की वजह भी यही थी।

पहले कर दिया था केबीसी में जाने से इन्कार
गाजी ने बताया, मुझे रमजान से पहले पहली बार केबीसी वालों की तरफ से फोन आया था। शायद उन्होंने कहीं मेरे बारे में सुना था। मैंने उस वक्त यह कहते हुए मना कर दिया था कि मैं केबीसी के बारे में कुछ नहीं जानता। पढ़ा-लिखा भी नहीं हूं। एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाऊंगा। इसके कुछ दिन बाद मुझे उनकी तरफ से फिर फोन आया। उन्होंने कहा कि सवालों के जवाब देने के लिए आपको एक पार्टनर दिया जाएगा। यह पार्टनर कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान थे। इसके बाद मैंने शो में जाने के लिए हामी भर दी। मैं गत 24 अक्टूबर को पत्नी तसलीमा बीबी, छोटे बेटे इसराफिल गाजी और एक परिचित के साथ मुंबई गया। अगले दिन एपिसोड की शूटिंग हुई और 26 को मैं कोलकाता लौट आया। मेरे कार्यक्रम का प्रसारण आगामी 2 नवंबर को होना है।

अभिभूत हुए अमिताभ-आमिर
गाजी द्वारा किए जा रहे कायरें से अमिताभ बच्चन और आमिर खान बेहद प्रभावित हुए। बकौल गाजी, अमिताभ बच्चन ने मुलाकात के दौरान मेरे काम की सराहना करते हुए कहा कि आप जो कर रहे हैं, वो तो शायद मैं भी नहीं कर पाऊंगा। आमिर खान ने भी मेरे काम की तारीफ करते हुए इसे जारी रखने के लिए कहा। दो इतनी बड़ी शख्सियतों के मुंह से ऐसी बातें सुनकर मेरा उत्साह दोगुना हो गया है।

सुंदरवन में खोलेंग नि:शुल्क कॉलेज
गाजी केबीसी से मिली धनराशि से सुंदरवन में गरीब छात्र-छात्राओं के लिए नि:शुल्क कॉलेज खोलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, सुंदरवन के बच्चों को कॉलेज की पढ़ाई के लिए दूर-दूर जाना पड़ता है। मैं चाहता हूं कि वे अपने इलाके में रहकर ही पढ़ सके, वो भी बिना किसी खर्च के।

संघर्ष भरा रहा है जीवन
गाजी महज सात साल की उम्र में परिवार के साथ पेट पालने कोलकाता आ गए थे। उनका बचपन फुटपाथ पर ही बीता। 14 साल की उम्र में उन्होंने हाथरिक्शा खींचा। बताते हैं, बड़ा हुआ तो टैक्सी चलाना सीख लिया। लेकिन साथ ही 500 से अधिक नौजवानों को टैक्सी चलाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दिया। इसके लिए सुंदरवन ड्राइविंग समिति की शुरुआत की। 1998 में गाजी ने सुंदरवन में पहला स्कूल खोला। इसके कुछ साल बाद दूसरा। 2015 में उन्होंने सुंदरवन आर्फनेज मिशन की शुरुआत की और अनाथालय खोला। अनपढ़ होने ने बावजूद गाजी इस बात को भली-भांति समझते हैं कि शिक्षा से ही बेरोजगारी दूर की जा सकती है।

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