लोक आस्था का महापर्व छठ हिंदू ही नहीं मुस्लिम महिलाओं के लिए भी पावन पर्व बन गया है। पहले मुस्लिम समुदाय के लोग छठ में सहयोग करते थे अब पर्व के प्रति आस्था और भगवन सूर्य पर उनका विश्वास ही है कि दर्जनों मुस्लिम महिलायें भी छठ कर रही हैं। ऐसी ही एक छठ व्रती हैं उलसुम खातून । 64 साल की उलसुम 2008 से ही छठ व्रत करती आ रही हैं।

उलसुम बताती हैं कि पोता नहीं होने से वे दुखी रहती थीl एक रात स्वप्न में एक बूढी औरत आई और कहा कि तुम छठी मैया को सूप गछ लो तो तुम्हें पोता होगा। उसी पर मैने छठी मैया से पोता के लिए मन्नतें मांगी और 2008 में पोता होते ही उसी साल से हर विधि विधान के साथ चार सूप चढाना शुरू किया।

इसी बस्ती के मो. सहिद की पत्नी रुजिदा खातून नौ साल से जोड़ा सूप छठी मैया को चढाती आ रही है। मो. सहुद की पत्नी जैनव खातून और मो. दाउद की पत्नी सकिना खातून पुत्र प्राप्ति के बाद दो साल से एक-एक सूप चढा रही है। लाल मोहम्मद की पुत्री साहनाज खातून ने भी पुत्र प्राप्ति के बाद पहली बार छठ पर्व में जोड़ा सूप चढा रही है।

इसी गांव के मो. इलियास की पत्नी जमिला (57) को गले की घातक बीमारी दूर होने से 2013 से जोड़ा सूप चढा रही है और मो. तसीर की पुत्री को भी मन्नतों से घातक बीमारी से बचाव हो जाने से पहली बार सूप चढा रही है।

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