हमने और आपने फिल्मों में रिवॉल्वर रानी देखी होगी, लेकिन आज आपको असल जिंदगी की एक ऐसी ही महिला के बारे में बता रहे हैं जिसे लोग रियल लाइफ की रिवॉल्वर रानी कहते हैं। ये महिला कोई लेडी डॉन नहीं है। और महिला ना ही पिस्टल किसी को डराने धमकाने के लिए रखती है। पटना जिला के गोनपुर पंचायत की मुखिया आभा देवी के काम और उनकी पहचान को देख कर रबर स्टांप वाली मुखिया वाली छवि गायब हो जाती है। वे असल मुखिया हैं। दबंग भी हैं। वे अपने फैसलों को लागू करने में सक्षम हैं। कोई उन्हें हल्के में न ले, इसके लिए वे रिवाॅल्वर भी रखती हैं।

 

गोनपुरा पंचायत की दबंग मुखिया आभा देवी की पहचान रिवाॅल्वर वाली मुखिया के रूप में बन गयी है। जो दिखने में तो साधारण कद-काठी की हैं और इंटर पास हैं। आभा देवी का नाम केवल गोनपुरा पंचायत के लोग ही नहीं, बल्कि दूर दराज के पंचायतों में भी जाना जाता है। पंचायत के विकास के दौरान जोखिम भरे मामलों से निबटने के लिए वे अक्सर रिवाॅल्वर अपने पास ही रखती हैं।



2011 में बनी मुखिया, 2016 में लिया पिस्टल रखने का लाइसेंस :
लाइव बिहार से विशेष बातचीत में मुखिया आभा देवी बताती है कि 2011 में पहली बार मुखिया बनने पर शुरूआती दिनों में पति राम अयोध्या शर्मा ने मदद की। बाद में अहसास हुआ कि लोगों ने मुझे मुखिया चुना है तो उनका फर्ज भी मैं निभाऊंगी और धीरे-धीरे पंचायत के विकास और सुरक्षा की कमान खुद संभाल ली। 2014 में मुखिया आभा देवी पर जानलेवा हमला भी हुआ, जिससे वह डरी सहमी नहीं। पहले तो डीएम से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए पिस्टल के लाइसेंस की मांग की। 2016 में उन्हें हथियार रखने का लाइसेंस भी मिल गया। और अब इस पिस्टल का उपयोग समाज की सुरक्षा और विकास के लिए बखूबी निभा रही हैं।


गांव की बेटियां उनकी दिलेरी से रहती हैं खुश :
खुले में शौच मुक्त पंचायत हो या फिर राशन दुकानों की गड़बड़ी, नाली-गली का निर्माण हो या फिर बेटियों के लिए स्कूल कॉलेज की सुविधा। सभी को लेकर उनकी जद्दोजहद देखते बनती हैं। पंचायत में बेटियों को मैट्रिक के बाद इंटर तक की पढ़ाई के लिए कॉलेज खुलवाने से लेकर आठ आंगनबाड़ी भवन एवं पंचायत और सामुदायिक भवन तक बनवाने का श्रेय उन्हें जाता है। इन सारे कार्यों को करने के दौरान धमकियां भी मिलीं, लेकिन वे इसकी परवाह नहीं करती हैं। 2016 में दूसरी बार मुखिया के पद पर चुने जाने के बाद वह लाइसेंसी रिवाॅल्वर रख कर काम कर रही हैं।

महादलित परिवार की बेटियों को जोड़ रही हैं उच्च शिक्षा से :
कौशल विकास योजना के तहत गांव की किशोरियों और महिलाओं का ग्रुप बना कर अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले आभा ने लड़कियों को जागरूक किया। इसके बाद कंप्यूटर ट्रेनिंग दिलायी। कई लड़कियां अब महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखा रही हैं। इसके लिए सरकार से लेकर एनजीओ तक का सहयोग लिया जा रहा है। दो बहनों की युगलबंदी : आभा रानी अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए वह सब कुछ कर रही हैं, जो विकास के लिए जरूरी है। आठ वर्षों से मुखिया के पद पर कार्यरत रहने के बाद अपने पंचायत में उन्हें बदलाव का प्रतीक माना जाता है। आभा अकेली नहीं हैं, उनकी सगी बहन अर्चना भी बिहटा प्रखंड के गोढ़ना पंचायत समिति के सदस्य के रूप में काम कर रही हैं।


किसान परिवार से था नाता :
वे बताती हैं कि उनके पिता कृषक हैं। 1992 में मेरी शादी फुलवारी प्रखंड के गोनपुरा पंचायत के बभनपुरा गांव में हुई थी। शादी के समय वह इंटर पास थी, पढ़ना चाहती थी। इसलिए बीए में नामांकन भी कराया। पर घर परिवार की जिम्मेदारियों के दौरान पढ़ाई पूरी नहीं कर पायीं। वह महिलाओं के लिये कुछ करना चाहती थीं।

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