बिहार केवल परवल के उत्पादन में ही नंबर वन राज्य नहीं है बल्कि परवल के सबसे ज्यादा व्यंजन बनाने में भी बिहार का कोई सानी नहीं है. परवल अच्छी तरह से साधारणतया गर्म और आर्द्र जलवायु के अन्दर पनपती है, इस कारण बिहार की धरती परवल की खेती के बिल्कुल मुफीद है. परवल की लता जमीन पर पसरती है और इसकी खेती नदियों के किनारे खूब की जाती है. इस कारण बिहार में परवल की भुजिया, सब्जी से लेकर मिठाई तक खूब बनायी जाती है. कोई भी पर्व हो, त्‍योहार हो या उत्सव, यह मिठाई हर वक्‍त मौजूद रहेगी. इसका मीठा और क्रंची स्‍वाद सभी को खूब भाता है. इसमें विटामिन-ए, विटामिन-बी 1, विटामिन बी-2 और विटामिन-सी के अलावा कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कैलोरी की मात्रा कम कर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है. डॉक्टरों के अनुसार परवल में मैग्नीशियम, पोटैशियम, फास्फोरस भी भरपूर मात्रा में होता है. आयुर्वेद के अनुसार परवल में त्वचा के रोग, बुखार और कब्ज की समस्याओं को खत्म करने वाले औषधीय गुण होते हैं. परवल में जो बीजों में कब्ज को दूर करने के गुण होते हैं इसके अलावा ये बीज रक्त में शर्करा और फैट्स को नियंत्रित करने का कार्य भी करते हैं. पेशाब संबंधी रोगों और मधुमेह की समस्या के लिए भी परवल बेहद लाभदायक है. परवल में भरपूर मात्रा में फाइबर्स होते हैं, जो क्रि‍या को बेहतर कर, पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. आयुर्वेद के अनुसार गैस की समस्या होने पर परवल को इलाज के तौर पर अपनाया जाता है.

ऐसे बनायी जाती है परवल की मिठाई
इस मिठाई को केवल एक तार की चाशनी से बनायी जाती है, जिससे ठंडी होने पर मिठाई में चाशनी जमे नहीं. परवल (छिले और बीच से चीरा लगाये हुए), मावा, शक्‍कर, हरी इलायची, बादाम, पिस्‍ता, मिल्‍क पावडर, सोडा बाइ कार्बोनेट चुटकी भर, केसर जमा कर लें और सबसे पहले स्‍टफिंग बनाएंगे, जिसके लिये खोए को एक पैन में रोस्‍ट करने के लिये रखेंगे. फिर उसमें आधा कप शक्‍कर मिलायें और आंच चालू रखेंगे. एक दूसरे पैन में बची हुई शक्‍कर और एक कप मिक्‍स कर के पतली चाशनी तैयार करेंगे. खोए में हरी इलायची मिला कर मिक्‍स करेंगे. अब खोए के नीचे आंच बंद कर के उसे उतार लें और उसमें बारीक कटे बादाम और पिस्‍ते मिलाएं. उसके बाद इसमें मिल्‍क पावडर भी मिलाएं.

फिर इस मिश्रण को एक प्‍लेट पर निकालें और ठंडा होने के लिये रख दें. अब हम परवलों को उबालने की तैयारी करेंगे. इसके लिये एक गहरे पैन या भगौने में पानी भर लेंगे और उसमें सोडा बाइर्कोनेट मिक्‍स करेंगे. जब पानी उबलने लगेगा तब उसमें परवल डाल कर 2-3 मिनट तक पकाएंगे और गैस बंद कर देंगे. फिर परवलों को निकाल कर उसमें से पानी निथार लें. फिर इन परवलों को एक तार वाली चाशनी में लगभग 1 घंटे तक ढंक कर रखें, जिससे वह पूरी तरह से मीठे हो जाएं. अब परवल का रंग बदल जायेगा. उसके बाद परवल निकालें और उसमें से चाशनी को निथार लें. फिर उसमें खोए का मिश्रण भरें और ऊपर से केसर के धागे लगा कर सजाएं. इस मिठाई को फ्रिज में रख कर एक हफ्ते तक बड़े ही आराम से खाया जा सकता है.

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