पटना: बिहार वासियों के लिए खुशखबरी है। अब पटना से दिल्ली तक की रेल यात्रा करने में अब पटना वासियों को अधिक परेशानी नहीं होगी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द 130-160 KM की स्पीड से ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। एक तरह से कहा जाए तो हजार किमी की दूरी महज दस से बारह घंटे में तय हो सकती है।

ताजा अपडेट के अनुसार पूर्व मध्य रेल मुख्यालय में गुरुवार को पूर्वी क्षेत्र के रेल संरक्षा आयुक्त राम कृपाल व जीएम ललित चंद्र त्रिवेदी व अन्य विभागाध्यक्षों के बीच बैठक में एसी और नॉन एसी एलएचबी कोचयुक्त ट्रेनों की गति में वृद्धि कर उन्हें 130 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाने पर चर्चा हुई। एलएचबी कोच युक्त पूर्वा एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस, गंगा सतलज एक्सप्रेस और अन्य रेल गाड़ियों की गति में बढ़ोतरी की योजना है। वर्तमान में ये गाड़ियां 110 किमी प्रतिघंटा की अधिकतम गति से चल रही हैं। रेल संरक्षा आयुक्त के अनुमोदन के बाद इनकी गति बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटा कर दी जाएगी।

बैठक में सकरी-निर्मली-सरायगढ़ के बीच चल रहे आमान परिवर्तन, शक्तिनगर-करैला रोड दोहरीकरण, दानापुर, सहरसा, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में चल रहे यार्ड रिमॉडलिंग पर विशेष रूप से चर्चा हुई। साथ ही अन्य परियोजनाओं से संबंधित संरक्षा विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। रेल संरक्षा आयुक्त ने रेल गाड़ियों के संरक्षित परिचालन पर भी पूर्व मध्य रेल के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

पटना से नई दिल्ली के बीच चलेगी देश की सबसे तेज ट्रेन, अगले महीने होगा ‘ट्रेन 18’ का स्पीड ट्रायल : शताब्दी से अधिक रफ्तार से चलने वाली नई ट्रेन का ट्रायल अगले महीने होगा। ट्रेन 18 नामक इस ट्रेन को सितंबर महीने से प्रायोगिक तौर पर चलाने की तैयारी है। ट्रायल सफल होने के बाद इस ट्रेन को भारतीय रेल के बेड़े में शामिल किया जाएगा। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित यह ट्रेन 160 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार ट्रेन 18 को नई दिल्ली से पटना, लखनऊ, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई जैसे शहरों के बीच चलाने की योजना है। इससे रेल यात्रियों को दिल्ली से इन शहरों का सफर तय करने में आसानी होगी।

इस ट्रेन से सफर करने पर शताब्दी एक्सप्रेस से भी आधा से एक घंटे तक कम समय लगेगा। भारतीय रेल के तकनीकी सलाहकार अनुसंधान डिजाइन व मानक संगठन (आरडीएसओ) इसका परीक्षण करेगा और ट्रेन को मान्यता प्रदान करेगा। यह ट्रेन मौजूदा शताब्दी एक्सप्रेस के बेड़े के ट्रेनों की जगह लेगी। आईसीएफ इस तरह के छह ट्रेनों का सेट तैयार करेगी। इसमें दो स्लीपर कोच भी होंगे।

ट्रेन 18 की खासियत : 2018 में ही शुरू होने वाली इस ट्रेन 18 में यात्रियों की सुविधा के लिए इंटर कनेक्टेड पूरी तरह बंद गैंगवे, स्वचलित दरवाजे, वाई-फाई और इंफोटेनमेंट, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली, जैव वैक्यूम प्रणाली और मॉडयूलर शौचालय और घूमने वाली सीटों की सुविधा है। इस ट्रेन का परिचालन शुरू होने के बाद देश के किसी भी कोने का सफर तय करना आसान हो जाएगा। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में फिलहाल छह नए ट्रेन सेट का निर्माण चल रहा है। ये ट्रेन मेट्रो की तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से चलेगी। इसके लिए इंजन की आवश्यकता नहीं होगी। ऑपरेशन में मैन पावर की आवश्यकता भी कम होगी। रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार भविष्य में शताब्दी जैसी ट्रेनों को हटाकर ट्रेन 19 चलाने की योजना है। पूरी तरह वातानुकूलित इस चेयरकार ट्रेन में वाई-फाई की भी सुविधा होगी।

Train 18 में इंजन नहीं होगा। ये मेट्रो ट्रेन्स की तर्ज पर बिजली से चलेंगी। इस ट्रेन से पहले से मौजूद इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेनों को रिप्लेस किया जाना है। रिप्लेस की जाने वाली ट्रेनों में शताब्दी भी शामिल हैं। आईसीएफ ऐसी 6 ट्रेनें बनाएगा और इनमें से दो में स्लीपर कोचेज भी होंगे। इस ट्रेन में पैसेंजर्स के कम्फर्ट का खास ख्याल रखा गया है। इसमें सभी डिब्बों को फुल सील्ड गैंगवेज के जरिए एक-दूसरे से जोड़ा गया है ताकि पैसेंजर्स आसानी से एक कोच से दूसरे में आ और जा सकें।

1. इस ट्रेन में आटोमैटिक दरवाजे दिए गए हैं। 2. वाई-फाई और इंफोटेनमेंट की सुविधा 3. GPS बेस्ड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम 4. मॉड्यूलर टॉइलट्स हैं जो कि बायो वैक्यूम सिस्टम से लैस हैं 5. इंप्रूव्ड कपलर्स हैं जो कि जर्क को कम करते हैं 6. सभी कोचेज में एसी चेयर कार से लैस हैं 8. वीलचेयर के लिए स्पेस

Source: Live Bihar

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