खीर मोहन शब्द सुनते ही मुंह में पानी जाता है. ऐसा स्वाद जो पूरे प्रदेश में और कहीं नहीं बल्कि सीतामढ़ी में बने खीरमोहन में ही है. प्रदेश भर में यहां की चुनिंदा दुकानों में बने इस मिठाई की जबरदस्त मांग है. त्योहार या विशेष अवसरों पर इसकी काफी खपत होती है और इन दिनों इसे पाने के लिए एडवांस बुकिंग करानी पड़ती है. यहां के खीर मोहन का स्वाद इतना लाजवाब है कि राजनेताओं से लेकर अफसरों की पसंद बने हुए हैं. जब भी कोई बाहर प्रियजन से मिलने जाता है तो खीरमोहन ले जाना नहीं भूलता. चाहे आम हो या खास, गरीब हो या अमीर खीर मोहन सबकी नंबर वन पसंदीदा मिठाई है. राजनीति से जुड़े लोग बताते हैं कि वे जब कभी किसी काम के लिए मंत्री या अधिकारियों के पास जाते हैं तो खीर मोहन ले जाना नहीं भूलते और जो काम बड़ी बड़ी सिफारिशों से नहीं होता उसे एक अदद खीर मोहन आसानी से करवा देता है. सीतामढ़ी में मोटे अनुमान के मुताबिक सभी दुकानों पर 35 से 40 किलो खीरमोहन की बिक्री रोजाना होती है, लेकिन कुछ खास दुकानों पर यह आंकड़ा सौ किलो तक भी पहुंच जाता है. इसके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, रांची आदि इलाकों में यहां तैयार खीरमोहन बिक्री के लिए भेजे जा रहे हैं. कुल मिला कर खीर मोहन की रोज की खपत 150 से 200 क्विंटल तक पहुंच जाती है.

ऐसे बनता है खीरमोहन
खीर मोहनके लिए पहले दूध को टाटरी से फाड़कर इसका छैना बनाया जाता है. इस छैने में थोड़ी सूजी और शक्कर मिलाकर इसे झज्जर से छानते हैं. फिर इस मिश्रण की गोलियां बनाकर इसे उबलती चाशनी में पकाते हैं. लाल भूरा रंग होने तक इसे पकाया जाता है और अगले दिन तक के लिए चाशनी में डाल दिया जाता है. अब खीरमोहन खाने के लिए तैयार है. अच्छा खीर मोहन वह माना जाता है जो मुंह में जाते ही घुल जाए और इसमें भीतर थोड़ी चाशनी भी हो.

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