पटना: कोयलांचल धनबाद के अकबर अंसारी के हाथ नहीं हैं. बावजूद इसके वह पिछले 12 सालों से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. अकबर पैर से बच्चों को पढ़ाते हैं. सरकार ने अबतक इनकी नौकरी स्थायी नहीं की है, लेकिन इसका मलाल उन्हें नहीं कभी नहीं रहा.

धनबाद के गोविंदपुर उर्दू प्राथमिक विद्यालय गायडेहरा में पारा शिक्षक के तौर पर मो. अकबर अंसारी सेवा दे रहे हैं. दोनों हाथ नहीं होने से उन्हें पढ़ाने में तकलीफ होती है, लेकिन वह इस तकलीफ को सहते हुए बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हुए हैं. दो बेटी और पत्नी सहित पूरे परिवार का बोझ भी उन्हीं के कंधे पर है.

जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग अकबर ने अपने काम के लिए पैर को तैयार किया. आज वह खुद के सारे काम करने के साथ-साथ पैर से पढ़ाते भी हैं. इग्नू से समाज शास्त्र में स्नातक करने के बाद वह साल 2005 में पारा शिक्षक में नियुक्ति हुए. पैरों के सहारे पढ़ाना या फिर ब्लैकबोर्ड पर लिखना-मिटाना या फिर बच्चों का होमवर्क चेक करना सारा काम वह खुद करते हैं. दिव्यांग होने के बावजूद अपने आप को मजबूती से खड़ा रखने के हौसले ने अकबर अंसारी को बच्चों के लिए प्रेरणा का श्रोत बना दिया है.

स्कूल के बच्चे मो. अकबर को अपना आदर्श गुरू मानते हैं और शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानित करना नहीं भूलते. साथी शिक्षक और प्रधानाध्यापक भी अकबर की काबलियत और जीवटता की खूब प्रशंसा करते हैं.

Source: News18

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