बिहार और पटना के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत त्रिपाठी पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल, राजाबाजार, पटना के हृदय रोग विभाग के नये डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष नियुक्त किये गये हैं. डॉ. त्रिपाठी हृदय ने डायरेक्टरेट की डिग्री संजय गांधी पोस्टगे्रजुएट इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ से ली. वे अमेरिका के सोसाइटी फॉर कार्डियोवेसकुलर एंजियोग्राफी एंड इंटरवेन्शन्स (एफएससीए) के फेलो रह चुके हैं.

बता दें कि पारस अस्पताल ज्वाइन करने से पहले वे इंदिरा गांधी इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पटना के कार्डियोलोजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर थे. इन्होंने बिहार में कई उपलब्धियां हासिल की. इन्होने बिहार में पहली बार ओसीटो गाइडेड एंजियोप्लास्टी, पहला रोटाबलेशन, पहला पांच मिमी डीईएस (मेडट्रोनिक), पहला सीआरटी-डी (एमपीपी) (एसजेएम) किया तथा पहले लेफ्ट डिस्टल रेडिएल इंटरवेंशन (एलडीटीआरए) की शुरूआत भी की.

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉ. त्रिपाठी ने एमडी मेडिसीन जीएसबीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर से किया. वहीं डीएम-कार्डियोलाजी उन्होने एसजीपीजीआई, लखनऊ से किया. इनकी विशेषज्ञता कार्डियेक इंटरवेन्शन्स में है तथा अब तक ये एक हजार से ज्यादा कार्डियेक इंटरवेंशन्सन कर चुके हैं तथा इनका लक्ष्य बिहार के लोगों में सुपरलेटिव इंटरवेंशनल कार्डियोलाजी सेवा उपलब्ध कराना है.

कोरोनरी आर्टरी की बीमारी, हार्ट फेल्योर, वल्वूलर हार्ट की बीमारी और इलेक्ट्रोफिजियोलाजी में इनकी विशेषज्ञता है. हाइपरटेंशन हार्ट की बीमारी, इसकेमिक हार्ट की बीमारी, सेरेब्रोवेसकुलर की बीमारी तथा इंफ्लामेंट्री हार्ट की बीमारी तथा रेडियल एंजियोप्लास्टी के अनेक मामलों का यह सफलतापूर्वक इलाज कर चुके हैं. कोरोनरी आर्टरी की बीमारी, हार्ट फेल्योर, हाइपरटेंशन, कार्डियोमायोपैथी, ट्रांसरेडियल प्रोसिड्योर, पेरीफेरल इंटरवेंशन तथा थेरापेटिक इमबोलिज्म इनके दिलचस्पी के क्षेत्र हैं.

डॉ. निशांत त्रिपाठी ने पारस ज्वाइन करने के बाद आम लोगों को दिये अपने संदेश में कहा कि देश में हृदय रोग तेजी से फैल रहा है, देश में प्रति वर्ष हो रही मौतों में एक तिहाई मौतें हृदय रोग से होती है. यदि लोग अपने रहन-सहन में बदलाव लाकर खान-पान तथा व्यायाम पर ध्यान देंगे तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर हृदय रोग से बचा जा सकता है. लोगों को तनाव से मुक्त रहना चाहिए तथा चीनी और नमक उचित मात्रा में ही लेना चाहिए.

शराब तथा धूम्रपान के साथ ही तम्बाकू का सेवन नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पारस 24 ग 7 हृदय रोग के इलाज के लिए खुला रहता है तथा यहां अत्याधुनिक मशीनों द्वारा उच्चस्तरीय इलाज की सुविधा उपलब्ध है.

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