पटना: अशोक चौधरी फिर से बिहार के शिक्षा मंत्री बन सकते हैं। नीतीश कैबिनेट के विस्तार की अटकलों के साथ ये भी चर्चा की विषय बना हुआ है। विस्तार में अशोक चौधरी को मंत्रीमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है। वर्तमान शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा को समाज कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौपें जाने से ये कयास भी तेज हो गया कि शिक्षा विभाग चौधरी के हवाले कर दिया जाएगा और वर्मा को समाज कल्याण विभाग का पूर्ण प्रभार दे दिया जाएगा।

पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के इस्तीफे के बाद नीतीश मंत्रीमंडल के विस्तार की चर्चा जोरों पर है। फिलहाल नीतीश कैबिनेट में आठ पद खाली हैं। वैसे भी आठ महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए मंत्रीमंडल विस्तार फायदेमंद हो सकता है। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की सदस्य संख्या को देखते हुए राज्य मंत्रिमंडल में 36 मंत्री ही रह सकते हैं।

27 जुलाई 2017 को सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने शपथ ली थी। इसके बाद 29 जुलाई को जेडीयू कोटे से 14,बीजेपी कोटे से 12 और एलजेपी से एक को मंत्री बनाया गया था। कैबिनेट में सात जगहें खाली रह गई थी। मंजू वर्मा के इस्तीफा के बाद अब आठ सीटें खाली हो गईं हैं।

समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा नीतीश कैबिनेट की अकेली महिला मंत्री थी। ऐसे में माना जा रहा है कि एक महिला सदस्य को कैबिनेट में जगह मिलना तय है। पूर्व मंत्री लेसी सिंह या फिर रंजू गीता को जेडीयू कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं कांग्रेस छोड़कर जेडीयू में शामिल हुए अशोक चौधरी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय है। उनको बैलेंस करने के लिए श्याम रजक को भी मंत्री बनाया जा सकता है।

मंजू वर्मा की रिक्त हुई सीट पर किसी कुशवाहा को मंत्री बनाये जाने की चर्चा है। अभय कुशवाहा उमेश कुशवाहा, रामसेवक सिंह और रामबालक सिंह इसके दावेदारों में शामिल हैं। मंत्रीमंडल में बीजेपी का कोटा लगभग फुल है। नीतीश कैबिनेट में आरएलएसपी को कोई जगह नहीं मिली है। अगर एनडीए के केंद्रीय नेतृत्व का दबाव पड़ा तो आरएसएसपी के सुधांशु शेखर को भी मंत्री बनाया जा सकता है।

Source: Live Bihar

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