संयुक्त राष्ट्र ने शांतिरक्षक अभियानों में भारत के बहुमूल्य योगदान के लिए उसकी सराहना की है. साथ ही शांति के लिए भारत के वर्दीधारी पुरुषों तथा महिलाओं की प्रेरणादायक सेवा के लिए उनकी तारीफ की. शांतिरक्षक अभियानों के लिए अवर महासचिव जीन पेरी लेक्रोइक्स ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षक अभियान बेहद जटिल वातावरण में चलते हैं और हम भारत जैसे दृढ़ साझेदारों के आभारी हैं जो नई चुनौतियों के सामने खड़ा है और नागरिकों की रक्षा के हमारे प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखे हैं.’

संयुक्त राष्ट्र का जन सूचना विभाग (डीपीआई) संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के 70 वर्ष पूरे होने पर ‘यूएन पीस कीपिंग-सर्विस एडं सेक्रीफाइज नाम से एक अभियान चला रहा है. इस अभियान का मकसद संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के साथ ही उन देशों के प्रति आभार व्यक्त करना है जो कि शांतिरक्षक अभियानों में अपने वर्दीधारी पुरुष और महिलाओं को भेजते हैं. यह अभियान एक-एक देश को आधारित करके चलाया जा रहा है और इस सप्ताह यह भारत पर केन्द्रित है. भारत शांतिरक्षक अभियानों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है और सबसे ज्यादा कर्मी यहीं के मारे गए हैं.

विशेष फीचर ‘इंडिया एडं द यून: सेलिब्रेटिंग 70 इयर्स ऑफ इनवैल्यूएबल सर्विस टू द कॉज ऑफ पीस’ के अनुसार लैक्रोइस ने कहा, ‘किसी भी अन्य सदस्य देश की तुलना में भारत ने सबसे ज्यादा शांतिरक्षक खोए हैं. हम इस नुकसान के लिए उनके परिवारों और भारत सरकार के लोगों के प्रति दुख व्यक्त करते हैं.

दक्षिण सूडान में 850 भारतीय बटालियन की कमान संभालने वाले कर्नल गौरव बत्रा के अनुसार इस प्रकार के प्रयास, ‘भारतीय संस्कृति का सामान्य हिस्सा है. ’ उन्होंने एक फीचर में कहा, ‘हमारे देश में भी कभी कभी हमें ऐसे क्षेत्रों में काम करने के लिए बुलाया जाता है जहां लोगों की समस्या दूर करना बेहद मुश्किल है. जब हम शांतिरक्षक अभियानों पर हैं उस वक्त जरूरत के वक्त कभी भी काम करना भारतीय सेना की प्रकृति है.’

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