पटना: आमतौर पर धारणा है कि किसानी का काम पुरुषों के जिम्मे है। लेकिन अगर सीता मां की जन्मस्थली सीतामढ़ी से गुजर रहे हों और कोई लड़की महिलाओं को इकट्ठा कर किसानी का गुर बताती नजर आए तो चौंकिएगा नहीं। जिले के चोरौत प्रखंड के र्बी बेहटा गांव की रहने वाली अनुपम कुमारी ऐसी लड़की है, जो आज कृषि क्षेत्र में पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही है।

अनुपम के इस जुनून ने न केवल उसके वजूद को नाम दिया है, बल्कि कई महिलाओं ने भी उसकी प्रेरणा से चूड़ियों से भरे हाथों में कुदाल थाम लिया है। यही कारण है कि आज इस क्षेत्र में अनुपम की पहचान ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में की जाती है। बीए की पढ़ाई करने वाली अनुपम शुरू से ही कुछ अलग करना चाहती थी। इसी कारण उसने कृषि क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की ठान ली।

पिता से ली प्रेणा
किसान पिता उदय कुमार चौधरी की पुत्री होने के कारण जन्म से ही अनुपम ने खेती-बारी को नजदीक से देखा था। कुछ अलग करने की चाहत ने उसे कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचा दिया और वहां उसने मशरूम उत्पादन और केंचुआ खाद उत्पादन विषयक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उसके बाद तो मानो यह पूरे गांव की महिलाओं की प्रशिक्षक बन गई। अनुपम ने गांव में ही नहीं, जिले के कई प्रखंडों के गांवों में महिलाओं को इकट्ठा कर उन्हें मशरूम उत्पादन के गुर सिखाने लगी। 



करना पड़ा कई समस्याओं का सामना अनुपम को हालांकि इस बात का मलाल है कि वे लोग तापमान के कारण सिर्फ सितंबर, अक्टूबर और नवंबर तीन महीने ही मशरूम उत्पादन कर पा रही हैं। वह कहती हैं कि फिलहाल ओएस्टर मशरूम का ही उत्पादन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा वह गांव-गांव में केंचुआ खाद उत्पादन (वर्मी कंपोस्ट) की भी जानकारी कृषकों को दे रही हैं। अनुपम बताती है कि शुरू में अन्य कार्यो की तरह उन्हें भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। बाद में महिलाओं का जुड़ाव उनसे होता गया और अब तो यह कारवां बन गया है। 



महिलाओं नेउठाए कुदाल वैज्ञानिकों का भी मानना है कि कृषि के जिन क्षेत्रों में पुरुषों का कब्जा था, वहां आज अनुपम के कारण अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनते देखा जा रहा है। आज अनुपम की पहचान ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में की जा रही है। अनुपम कहती हैं कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनते देखकर सुकून मिलता है। आज महिलाएं अपनी जरूरतें की चीजें खुद पूरी कर रही हैं। उनमें आत्मबल का संचार हुआ है।

मिले कई पुरूस्कारअनुपम को कृषि के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 22 फरवरी को पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी क्षेत्र की ओर से आयोजित 18वें स्थापना दिवस समारोह में प्रशस्ति पत्र देकर हौसला अफजाई की थी। इसके अलावा भी अनुपम को कई पुरूस्कार मिल चुके हैं। 

हो रहा है महिलाओं का कल्याण र्बी बेहटा गांव की महिलाएं भी आज अपनी बेटी अनुपम को ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में पहचान बनाए जाने से गर्व महसूस करती हैं। गांव की महिला यशोदा देवी कहती हैं कि सीतामढ़ी की पहचान मां सीता की जन्मस्थली के रूप में है, आज इसी सीता की धरती पर अनुपम भी महिलाओं के कल्याण में जुटी है। 

Source: Etv Bihar

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